Last Updated May - 20 - 2026, 04:15 PM | Source : Fela News
तुर्की 6000 किमी रेंज वाली खतरनाक मिसाइल बनाने की तैयारी में है. दावा है कि यह मिसाइल 300 किलो पेलोड के साथ भारत और अमेरिका जैसे देशों तक हमला करने में सक्षम होगी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने दुनिया की बड़ी ताकतों की चिंता बढ़ा दी है. तुर्की अब पहली बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बनाने की तैयारी कर रहा है. इस मिसाइल का नाम ‘यिल्दिरिमहान’ बताया जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 6000 किलोमीटर तक हो सकती है. यानी यह मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को निशाना बनाने में सक्षम होगी.
तुर्की रक्षा मंत्रालय ने इस्तांबुल में आयोजित SAHA 2026 रक्षा प्रदर्शनी के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी दी. इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मिसाइल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. खास बात यह है कि तुर्की से भारत और अमेरिका की दूरी लगभग 5000 किलोमीटर के आसपास है, ऐसे में इस मिसाइल की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
प्रचार वीडियो में अमेरिका-भारत तक का जिक्र
तुर्की की ओर से जारी प्रमोशनल वीडियो में इस मिसाइल की क्षमता को दिखाया गया है. वीडियो में अमेरिका से लेकर भारत तक के क्षेत्रों को मैप पर दर्शाया गया, जिसने वैश्विक रणनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. तुर्की का दावा है कि यह मिसाइल उसकी सैन्य ताकत और वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगी.
क्यों बढ़ी दुनिया की चिंता?
अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है. अमेरिका लंबे समय से ऐसी मिसाइलों को लेकर बेहद सतर्क रहा है. मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) के तहत अमेरिका उन देशों पर नजर रखता है, जो लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित करते हैं.
आमतौर पर 300 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली मिसाइलों पर वैश्विक निगरानी रहती है. हाल ही में पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइल योजना पर भी अमेरिका ने चिंता जताई थी. अब तुर्की की नई योजना ने रणनीतिक समीकरण बदल दिए हैं.
कितनी खतरनाक होगी ‘यिल्दिरिमहान’?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल चार शक्तिशाली रॉकेट इंजनों से लैस होगी और ध्वनि की गति से 25 गुना ज्यादा रफ्तार से उड़ान भर सकेगी. इसमें तरल नाइट्रोजन टेट्रोक्साइड आधारित ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा.
सबसे बड़ी बात यह है कि यह मिसाइल करीब 3000 किलोग्राम तक का भारी पेलोड ले जाने में सक्षम बताई जा रही है, जो MTCR की तय सीमा से कई गुना ज्यादा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह परियोजना सफल होती है, तो तुर्की दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास ICBM तकनीक होगी.
हालांकि, तुर्की ने साफ किया है कि मिसाइल का परीक्षण अभी बाकी है. फिलहाल किसी बड़े देश ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब तुर्की की इस नई सैन्य परियोजना पर टिक गई है।
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