Last Updated Jun - 23 - 2025, 12:50 PM | Source : Fela News
UN रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दो युद्धों और छह संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों पर भयावह असर पड़ा—हत्या, अपहरण, यौन हिंसा और शिक्षा से वंचित होना आम हो गया है।
इस वर्ष बच्चों के खिलाफ सशस्त्र संघर्षों में हिंसा और अपराध का स्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में संघर्ष सीमाओं में बच्चों पर दर्ज की गई सांवीक (grave) उल्लंघनों की संख्या में 25% की भारी वृद्धि हुई है, जो 41,370 घटनाओं तक पहुँच गई है ।
इस आंकड़ों के अनुसार, 22,495 बच्चों की मौत, घायल होना, मानवीय सहायता से वंचित होना या लड़ाई में शामिल किए जाना शामिल है। स्कूलों पर हमलों में 44% की वृद्धि, यौन हिंसा में 35% की बढ़ोतरी, और बच्चों का बहुपक्षीय उल्लंघनों (multiple violations) का सामना करना इस संकट को और गहरा करता है ।
गाजा क्षेत्र में 4,856 उल्लंघन दर्ज किए गए, जिनमें से कई में बच्चों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया और हज़ारों बच्चे हताहत या घायल हुए । इसी तरह, कांगो गणराज्य, सोमालिया, नाइजीरिया और हैती जैसे देशों से भयानक आंकड़े सामने आए। विशेष रूप से DRC में 4,000 से अधिक बच्चों को सशस्त्र समूहों ने भर्ती किया, और हैती में यौन हिंसा के सौ से ज़्यादा घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें से कई सामूहिक बलात्कार थे ।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि बच्चों को हथियारों की तुलना में कम गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, और यह "बच्चों पर युद्ध" बन चुका है। UN की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गम्बा ने चेतावनी दी है कि यदि यही रुझान जारी रहे, तो यह मानवता के लिए अपरिवर्तनीय क्षति लेकर आ सकती है: "बच्चों से उनका बचपन छीना जा रहा है" ।
इस रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का औचित्य, और संगठित कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है। Save the Children और UNICEF जैसी संस्थाओं ने कहा है कि यौन हिंसा को सामान्य हथियारों की तरह गंभीरता से देखा जाए, और आपात राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत पहल होनी चाहिए ।
2024 को बच्चों के लिए अत्यंत काला साल बताया जा सकता है। हिंसा, भर्ती, यौन शोषण और शिक्षा व मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहने की त्रासदी ने वैश्विक समुदाय के सामने चेतावनी की घंटी बजा दी है। UN और अन्य संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की पुकार लगा रहे हैं, ताकि बच्चों को युद्ध की विभीषिका से बचाया जा सके और उन्हें खोया हुआ बचपन वापस लौटाया जा सके।