Last Updated Dec - 19 - 2025, 04:33 PM | Source : Fela News
युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी, राजनीतिक अस्थिरता और भारत-विरोधी तनाव बढ़ा
बांग्लादेश की राजधानी ढाका और कई शहरों में हाल ही में हिंसा, आगजनी और प्रदर्शन देखने को मिले, जब युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैली। उनके निधन ने राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल को और बढ़ा दिया है।
शरीफ उस्मान हादी 32 वर्ष के थे और वह बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों में एक विख्यात छात्र नेता और आंदोलनकर्ता थे। वे इंकलाब मंच नामक संगठन के प्रमुख सदस्यों में से एक थे और जुलाई 2024 के बड़े विद्रोही आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ जनता को संगठित किया था।
हादी को कट्टर भारत-विरोधी रुख के लिए भी जाना जाता था। उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर “ग्रेटर बांग्लादेश” का एक नक्शा साझा किया था, जिसमें भारत के कुछ पूर्वोत्तर हिस्से को अपने प्रस्तावित नक्शे में दिखाया गया था, जिससे विवाद और घमासान पैदा हुआ। उनके आलोचक कहते हैं कि इस तरह के नक्शों और बयानबाज़ी ने लोगों के बीच तनाव और अस्थिरता को और बढ़ा दिया।
दिसंबर की शुरुआत में ढाका के बिजॉयनगर इलाके में एक अज्ञात व्यक्ति ने हादी पर गोली चलायी थी, जब वह ढाका-8 सीट से चुनाव प्रचार कर रहे थे। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें पहले ढाका के अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया, जहाँ उनकी मौत हो गयी।
उनकी मौत की खबर फैलते ही प्रदर्शनकारियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर उड़ गया। हजारों लोग प्रदर्शन करने लगे, कुछ तो मीडिया हाउसों, जैसे देश के बड़े अखबारों द डेली स्टार और प्रथम आलो के कार्यालयों में आग लगाने तक पहुँच गये। इन प्रदर्शनों के दौरान अवामी लीग पार्टी के दफ्तरों पर भी हमला हुआ और कई जगह भारत-विरोधी नारेबाजी देखने को मिली।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने देश भर में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है और लोगों से शांत रहने तथा कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही, हादी के हत्यारों को पकड़ने का वादा भी किया गया है, क्योंकि यह मामला अब राजनीतिक अस्थिरता, भविष्य के चुनाव और दो देशों के बीच संवेदनशील रिश्तों को प्रभावित कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक तनाव और कट्टर विचारधारा के गहरा विभाजन उजागर किया है, जिससे समाज में आगे गंभीर परिणामों और सुरक्षा चिंताओं पर सवाल उठ रहे हैं।