Last Updated Oct - 11 - 2025, 04:53 PM | Source : Fela News
काबुल में अफगान विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को रोक दिया गया। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचा दिया, जबकि सरकार ने सफाई दी क
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वक्त विवादों में आ गई जब महिला पत्रकारों को प्रवेश से रोक दिया गया। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की थी, जिसमें विदेशी और स्थानीय मीडिया के कई प्रतिनिधि मौजूद थे। लेकिन जब महिला पत्रकारों ने अंदर जाने की कोशिश की, तो सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया और कहा कि "उनका नाम लिस्ट में नहीं है"।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हुआ और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने इसे महिला अधिकारों पर हमला बताया। कई लोगों ने कहा कि तालिबान सरकार अब भी महिलाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और प्रेस की आज़ादी पर रोक लगा रही है। विपक्षी नेताओं ने भी इसे शर्मनाक बताया और सवाल उठाया कि आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है।
विवाद बढ़ने के बाद अफगान विदेश मंत्रालय की ओर से सफाई दी गई। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “महिला पत्रकारों को जानबूझकर नहीं रोका गया, बल्कि सीटों की सीमित व्यवस्था और सुरक्षा कारणों की वजह से कुछ प्रतिनिधियों को अनुमति नहीं दी जा सकी।” उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में मीडिया को बुलाने की प्रक्रिया और पारदर्शी बनाई जाएगी।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब तालिबान शासन में महिलाओं से जुड़ा ऐसा विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी अफगान सरकार ने महिलाओं की शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की ‘नो एंट्री’ ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अफगानिस्तान में महिला अधिकारों की स्थिति फिर से पीछे जा रही है।
दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, अफगान सरकार की कोशिश अब इस विवाद को शांत करने की है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये केवल “इमेज बचाने” की कोशिश है, जबकि असल समस्या तालिबान के रवैये में छिपी है।
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