Last Updated Feb - 11 - 2026, 11:45 AM | Source : Fela News
सही दिशा, रंग, रोशनी और व्यवस्था से अध्ययन कक्ष बनाएं शक्तिशाली, जिससे बढ़े एकाग्रता, स्मरण शक्ति और मिले शिक्षा में शानदार सफलता।
अध्ययन-कक्ष कैसा होना चाहिए ?क्या है वास्तु का महत्व? आएगे जानते हैं किन बातों को ध्यान में रखकर हम अध्ययन कक्ष को और बेहतर बना सकते हैं।
1)शिक्षा में सफलता, बेहतर एकाग्रता और स्मृति के लिए अध्ययन कक्ष उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
2)पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
3)मेज को दीवार से थोड़ा दूर (3-4 इंच) रखें, लकड़ी का फर्नीचर उपयोग करें, और कमरा साफ-सुथरा रखें।
4)सकारात्मकता के लिए हल्का पीला या सफेद रंग उत्तम है।
शिक्षा के लिए अध्ययन कक्ष के लिए विशेष वास्तु टिप्स:
> अध्ययन कक्ष (Study Room): सबसे अच्छी जगह उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में अध्ययन से बचना चाहिए।
> मेज की दिशा: अध्ययन मेज को कमरे के दक्षिण-पश्चिम (SW) या दक्षिण (S) कोने में इस तरह रखें कि पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
> फर्नीचर का प्रकार: लकड़ी की चौकोर या आयताकार मेज का उपयोग करें। अंडे के आकार (oval) की टेबल से बचें।
> रोशनी और रंग: स्टडी टेबल पर पर्याप्त रोशनी (टेबल लैंप) होनी चाहिए। कमरे में हल्के रंगों जैसे सफेद, हल्का पीला, या हल्का नीला का प्रयोग करें।
> अध्ययन डेस्क की सजावट: किताबों को अव्यवस्थित न रखें, उन्हें अलमारी में रखें। डेस्क पर केवल आवश्यक सामग्री रखें। पढ़ाई के दौरान बिस्तर पर न बैठें।
> वास्तु वस्तुएं: एकाग्रता बढ़ाने के लिए मेज पर सरस्वती यंत्र (Saraswati Yantra) रख सकते हैं।
इनसे बचें: स्टडी डेस्क के ऊपर बीम (beam) नहीं होनी चाहिए। फटी किताबें या टूटी स्टेशनरी हटा दें।
उपरोक्त सभी बातों का ध्यान रखकर आप अपने लिए अध्ययन हेतु एक अच्छा वातावरण तैयार कर सकते हैं।
ऊर्जा नमन ????
उमिका शर्मा
(अंक-ज्योतिषाचार्या,वास्तु-एक्सपर्ट)
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