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ITR में ये गलती पड़ी भारी तो 7 साल जेल तय!

ITR में ये गलती पड़ी भारी तो 7 साल जेल तय!

Last Updated Apr - 27 - 2026, 11:22 AM | Source : Fela News

ITR Filing Alert: ITR फाइलिंग शुरू होते ही टैक्सपेयर्स अलर्ट हो जाएं. रिटर्न भरते समय की छोटी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है, क्योंकि गलत जानकारी देने पर जेल और भारी जुर्माने का खतरा है।
ITR में ये गलती पड़ी भारी तो 7 साल जेल तय!
ITR में ये गलती पड़ी भारी तो 7 साल जेल तय!

ITR Filing: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है और इस बार टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1 से ITR-7 तक सभी फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं, यानी अब रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 31 जुलाई आखिरी तारीख है, जबकि कुछ कारोबारी वर्ग के लिए अलग डेडलाइन तय की गई है।

ITR में चालाकी पड़ी तो सीधा एक्शन

विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरते समय जानबूझकर इनकम कम दिखाना, गलत निवेश दिखाकर टैक्स बचाना या फर्जी दस्तावेज लगाना अब बेहद महंगा पड़ सकता है। आयकर विभाग ऐसे मामलों में सिर्फ नोटिस ही नहीं भेजता, बल्कि टैक्स की रकम का 200 फीसदी तक जुर्माना भी लगा सकता है।

सबसे बड़ी बात यह है कि आयकर अधिनियम की धारा 276(1) के तहत अगर टैक्स चोरी या आय छिपाने का मामला जानबूझकर किया गया पाया गया, तो 7 साल तक की जेल और अलग से भारी आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

कौन-कौन सी गलतियां बन सकती हैं अपराध?

आईटीआर भरते वक्त कई लोग छोटी समझकर बड़ी गलती कर बैठते हैं। जैसे विदेश में बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी, शेयर बाजार का बड़ा मुनाफा या दूसरी इनकम छिपाना सीधा उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा HRA के लिए फर्जी रेंट रसीद, 80G में नकली डोनेशन स्लिप या बिना निवेश के 80C क्लेम करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

अगर कोई टैक्सपेयर अकाउंट बुक, वाउचर या इनकम रिकॉर्ड में हेरफेर करता है तो विभाग इसे जानबूझकर टैक्स बचाने की कोशिश मानता है। बार-बार ऐसी गड़बड़ी मिलने पर आयकर विभाग प्रॉसिक्यूशन तक शुरू कर सकता है।

अनजाने में हुई गलती का भी पड़ेगा असर

हालांकि अगर गलती जानबूझकर नहीं बल्कि लापरवाही में हुई है, तब भी राहत पूरी नहीं है। ऐसे मामलों में टैक्स की देनदारी पर 50 फीसदी तक पेनाल्टी लग सकती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि फॉर्म भरने से पहले Form 16, AIS, TIS, बैंक डिटेल, कैपिटल गेन और सभी डिडक्शन का मिलान जरूर कर लें।

सीधी बात ये है—ITR अब सिर्फ एक फॉर्मैलिटी नहीं, बल्कि हाई स्क्रूटनी वाला दस्तावेज बन चुका है। एक गलत कॉलम आपकी जेब भी खाली कर सकता है और कानूनी मुसीबत भी खड़ी कर सकता है।

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