Last Updated Apr - 25 - 2026, 11:28 AM | Source : Fela News
Palm Oil Crisis in India: कच्चे तेल के बाद अब भारत में पाम ऑयल की आपूर्ति पर संकट गहराता जा रहा है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
India Palm Oil Crisis: भारत एक बार फिर जरूरी खाद्य तेल संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हालात बिगड़ने के बाद जहां कच्चे तेल की सप्लाई पहले से प्रभावित है, वहीं अब पाम ऑयल की वैश्विक आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर पड़ सकता है।
भारत क्यों है सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक?
भारत दुनिया में पाम ऑयल का सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक देश है। देश में हर साल लगभग 9.5 मिलियन टन पाम ऑयल की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन 4 लाख टन से भी कम है। यानी अपनी जरूरत का लगभग पूरा हिस्सा भारत विदेशों से आयात करता है।
पाम ऑयल का उपयोग सिर्फ खाने के तेल में ही नहीं बल्कि साबुन, बिस्किट, चिप्स, स्नैक्स और कई पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता के खर्च पर असर डालता है।
पाम ऑयल कैसे बनता है?
पाम ऑयल ताड़ के पेड़ों से निकाला जाता है, जिन्हें गर्म और नम जलवायु के साथ भारी बारिश और पानी की जरूरत होती है। दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर इंडोनेशिया और मलेशिया, दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है, जिससे सप्लाई चेन वैश्विक घटनाओं पर काफी निर्भर रहती है।
इंडोनेशिया का फैसला बना चिंता की वजह
भारत अपने कुल पाम ऑयल आयात का लगभग 90% विदेशों से लाता है, जिसमें करीब 45-50% हिस्सा अकेले इंडोनेशिया से आता है।
लेकिन अब इंडोनेशिया सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पाम ऑयल को निर्यात की बजाय घरेलू उपयोग में लगाने की नीति अपनाई है। इसका मुख्य कारण बायोडीजल (B50) उत्पादन को बढ़ावा देना है।
वैश्विक सप्लाई में बड़ी कमी का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, इंडोनेशिया के इस कदम से वैश्विक बाजार में हर साल 15 से 20 लाख टन पाम ऑयल की कमी हो सकती है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ेगा।
भारत पर क्या होगा असर?
यदि पाम ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में खाद्य तेल से लेकर रोजमर्रा के पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स तक महंगे हो सकते हैं। साबुन, बिस्किट, चिप्स और स्नैक्स जैसी चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है।
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