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New Income Tax Rule: 50 हजार से ज्यादा किराया? जानिए पूरा टैक्स नियम A टू Z

New Income Tax Rule: 50 हजार से ज्यादा किराया? जानिए पूरा टैक्स नियम A टू Z

Last Updated Apr - 02 - 2026, 11:02 AM | Source : Fela News

अगर आपका मासिक किराया 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो अब किराया देने के साथ टैक्स नियमों का पालन करना भी जरूरी है। जानिए इससे जुड़े नए नियम और जिम्मेदारियां।
50 हजार से ज्यादा किराया?
50 हजार से ज्यादा किराया?

Rent Above 50000 TDS Rules: अगर आप हर महीने 50,000 रुपये या उससे ज्यादा किराया देते हैं, तो अब आपको सिर्फ किराया देना ही काफी नहीं होगा। साल 2026 से लागू नए नियम के तहत किरायेदारों पर एक नई टैक्स जिम्मेदारी भी आ गई है। आयकर विभाग के सेक्शन 194-IB के अनुसार अब किरायेदार को ही TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटकर जमा करना होगा।

पहले यह जिम्मेदारी मकान मालिक से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब किराया देने वाले व्यक्ति को खुद यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसका मतलब है कि अगर आपका मासिक किराया 50,000 रुपये से अधिक है, तो आपको पूरे साल के कुल किराए पर 2 प्रतिशत TDS काटना होगा।

नियम में क्या बदलाव हुआ

नए नियम के अनुसार, किरायेदार को सालभर के कुल किराए पर 2 प्रतिशत TDS देना होगा। आमतौर पर यह राशि साल के अंत में, यानी मार्च महीने में एक साथ काटी जाती है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आप हर महीने 75,000 रुपये किराया देते हैं, तो सालभर में आपका कुल किराया 9 लाख रुपये होगा। इस पर 2 प्रतिशत के हिसाब से 18,000 रुपये TDS बनता है। यह रकम आपको एक बार में जमा करनी होगी, इसलिए पहले से इसकी योजना बनाना जरूरी है।

समय पर TDS जमा करना जरूरी

इस नियम को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। अगर आपने समय पर TDS नहीं काटा या जमा नहीं किया, तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह किरायेदार पर ही आएगी। ऐसे में आयकर विभाग की ओर से जुर्माना और ब्याज भी लगाया जा सकता है।

TDS काटने के बाद इसे 30 दिनों के भीतर जमा करना जरूरी होता है। यानी अगर आपने मार्च में TDS काटा है, तो 30 अप्रैल तक इसे जमा करना होगा। इसके साथ ही Form 26QC भरना अनिवार्य है।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद किरायेदार को मकान मालिक को Form 16C देना होता है, जिससे यह साबित होता है कि TDS सही तरीके से जमा किया गया है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए चुनौती

इस नियम का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों पर पड़ सकता है। क्योंकि उन्हें पूरे साल का TDS एक साथ जमा करना होता है, जिससे अचानक आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में सलाह दी जाती है कि किरायेदार पहले से योजना बनाएं और हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम अलग रखें, ताकि साल के अंत में एकमुश्त भुगतान करने में परेशानी न हो।

इसके अलावा मकान मालिक से पहले ही इस विषय पर बातचीत कर लेना भी जरूरी है, ताकि आगे किसी तरह की गलतफहमी या विवाद की स्थिति न बने।

क्या ध्यान रखना जरूरी

कुल मिलाकर, 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देने वालों के लिए यह नियम काफी महत्वपूर्ण है। समय पर TDS काटना, सही फॉर्म भरना और तय समय में राशि जमा करना जरूरी है।

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