Last Updated Feb - 03 - 2026, 05:20 PM | Source : Fela News
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की खबर के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी। डॉलर के मुकाबले रुपये में एक ही दिन में तेज मजबूती दर्ज की गई।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी सहमति का असर अब सीधे वित्तीय बाजारों पर दिखाई देने लगा है। डील से जुड़े संकेतों के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक ही दिन में मजबूत हुआ है। बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार यह हाल के समय में रुपये की सबसे बड़ी एकदिनी मजबूती मानी जा रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
सूत्रों के अनुसार ट्रेड डील में टैरिफ कटौती और व्यापारिक बाधाएं कम होने की संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है। इसी का असर सोमवार को करेंसी मार्केट में देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले तेज बढ़त के साथ बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि यह उछाल केवल तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इसका लाभ मिल सकता है। इन क्षेत्रों में बेहतर आउटलुक के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका सीधा असर रुपये की मजबूती पर पड़ा है।
वहीं दूसरी ओर डॉलर इंडेक्स में हल्की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने भी रुपये को सपोर्ट दिया है। बताया जा रहा है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा हुआ है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रुपये में आई मजबूती पर सरकार और आरबीआई दोनों नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का मानना है कि स्थिर और मजबूत मुद्रा से आयात महंगा नहीं होगा और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप किया जा सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक ट्रेड डील के अंतिम प्रावधानों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और निवेशक इसे भारत की आर्थिक स्थिति के लिए अनुकूल संकेत के रूप में देख रहे हैं।