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गांधी से पहले नोटों पर कौन था? भारतीय करेंसी का इतिहास

गांधी से पहले नोटों पर कौन था? भारतीय करेंसी का इतिहास

Last Updated Feb - 07 - 2026, 01:49 PM | Source : Fela News

आज भारतीय नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर आम है, लेकिन आज़ादी से पहले और बाद में नोटों पर किन चेहरों और प्रतीकों को जगह मिली- इसका इतिहास बेहद दिलचस्प है।
भारतीय करेंसी का इतिहास
भारतीय करेंसी का इतिहास

आज भारतीय करेंसी नोटों पर Mahatma Gandhi  की तस्वीर देखना हमारे लिए बिल्कुल सामान्य बात है। दशकों से यह चेहरा भारतीय मुद्रा की पहचान बना हुआ है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महात्मा गांधी से पहले भारतीय नोटों पर किसकी तस्वीर छपती थी और यह बदलाव आखिर क्यों और कैसे हुआ। 

आज़ादी से पहले : अंग्रेजी हुकूमत की छाप 

जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब जारी होने वाले भारतीय नोटों पर अंग्रेज़ी राज का प्रतीक साफ नजर आता था। उस दौर में नोटों पर ब्रिटेन के सम्राट King George V की तस्वीर छपती थी। बाद में उनके उत्तराधिकारी King George VI की तस्वीर वाले नोट भी चलन में आए। 

ये नोट ब्रिटिश सरकार द्वारा इंग्लैंड में छपवाए जाते थे और इनका कागज, डिजाइन और उभरी हुई छपाई काफी उन्नत मानी जाती थी। इन नोटों पर भारतीय पहचान से ज्यादा औपनिवेशिक सत्ता की झलक दिखती थी। 

आज़ादी के बाद: विदेशी चेहरों को हटाने का फैसला 

1947 में देश आज़ाद होने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल था- नई भारतीय पहचान क्या होगी ? इसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। भारत सरकार और Reserve Bank of India ने तय किया कि अब नोटों पर किसी विदेशी शासक की तस्वीर नहीं होगी। 

इतना ही नहीं, शुरुआत में यह भी निर्णय लिया गया कि किसी भी व्यक्ति की तस्वीर नोटों पर नहीं छापी जाएगी, ताकि मुद्रा किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र से जुड़ी दिखे। 

अशोक स्तंभ बना राष्ट्रीय प्रतीक 

इसी सोच के तहत भारतीय नोटों पर Ashoka Pillar के सिंह चिन्ह को अपनाया गया। इसके साथ खेती, उद्योग, विकास और भारतीय संस्कृति से जुड़े चित्र नोटों पर छपने लगे। कई दशकों तक यही डिजाइन भारतीय नोटों की पहचान बना रहा। गांधी की एंट्री: पहली बार 1969 में 

महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर एक विशेष स्मारक नोट पर छापी गई। इस नोट में गांधी जी बैठे हुए दिखाई देते हैं और पृष्ठभूमि में सेवाग्राम आश्रम नजर आता है। हालांकि, यह नोट सीमित उद्देश्य के लिए था और इसे नियमित श्रृंखला में शामिल नहीं किया गया। 

1996: गांधी सीरीज़ की शुरुआत 

असल बदलाव 1996 में आया, जब आरबीआई ने नई "महात्मा गांधी सीरीज़" शुरू करने का फैसला किया। इस बार गांधी जी की तस्वीर को स्थायी रूप से भारतीय नोटों पर शामिल किया गया। शुरुआत में 10 और 500 रुपये के नोटों पर उनकी तस्वीर छापी गई, जिसके बाद धीरे-धीरे सभी प्रमुख नोटों पर यही डिजाइन अपनाया गया। 

गांधी को चुनने के पीछे तर्क साफ था – वे भारत की आज़ादी का सबसे बड़ा चेहरा थे और दुनिया भर में सत्य, अहिंसा और शांति के प्रतीक माने जाते थे। 

तस्वीर बदलने की मांग और सरकार का रुख 

समय-समय पर यह मांग उठती रही है कि नोटों पर गांधी की जगह अन्य महान व्यक्तियों जैसे Jawaharlal Nehru, Subhas Chandra Bose, Sardar Vallabhbhai Patel या देवी-देवताओं की तस्वीर छापी जाए। 

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर बदलने की कोई योजना नहीं है। 2016 में 

तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री ने संसद में बताया था कि पहले गठित समिति भी इसी निष्कर्ष पर पहुंची थी। 

भारतीय नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर आज़ादी के बाद बनी राष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है। 

यह भारत के मूल्यों, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक सोच का प्रतीक है। 

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