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बिना नॉमिनी भी मिलेगा FD का पैसा, जानें आसान नियम

बिना नॉमिनी भी मिलेगा FD का पैसा, जानें आसान नियम

Last Updated May - 09 - 2026, 04:42 PM | Source : Fela News

बिना नॉमिनी और वसीयत के भी मिल सकता है FD का पैसा. जानिए बैंक किन दस्तावेजों के आधार पर करता है क्लेम सेटलमेंट और परिवार कैसे आसानी से निकाल सकता है जमा रकम।
बिना नॉमिनी भी मिलेगा FD का पैसा
बिना नॉमिनी भी मिलेगा FD का पैसा

जब परिवार का कोई सदस्य दुनिया छोड़कर चला जाता है, तो दुख के बीच एक बड़ा सवाल बैंक में जमा पैसों और एफडी को लेकर भी खड़ा हो जाता है. अगर फिक्स्ड डिपॉजिट में नॉमिनी या वसीयत मौजूद हो तो प्रक्रिया आसान रहती है, लेकिन जब दोनों में से कुछ भी न हो, तब परिवार के लिए पैसा निकालना मुश्किल लगने लगता है. हालांकि ऐसे मामलों में भी बैंक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत क्लेम सेटल करते हैं.

सबसे पहले बैंक क्या चेक करता है?

किसी भी एफडी क्लेम में बैंक सबसे पहले यह देखता है कि खाते में कोई नॉमिनी दर्ज है या नहीं. अगर नॉमिनी मौजूद है, तो डेथ सर्टिफिकेट और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद बैंक रकम जारी कर सकता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात यह भी है कि नॉमिनी हमेशा अंतिम कानूनी वारिस नहीं माना जाता. कई मामलों में वह सिर्फ रकम प्राप्त करने वाला व्यक्ति होता है, जबकि असली अधिकार कानूनी वारिसों का होता है.

अगर नॉमिनी नहीं है तो क्या होगा?

यहीं से प्रक्रिया थोड़ी लंबी और कानूनी हो जाती है. अगर एफडी में कोई नॉमिनी नहीं है, तो बैंक कानूनी वारिसों के दस्तावेज मांगता है. इसमें लीगल हेयर सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन जैसे डॉक्यूमेंट शामिल हो सकते हैं. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तय किया जाता है कि जमा रकम किसे मिलेगी.

कौन होता है कानूनी वारिस?

कानूनी वारिस का फैसला परिवार पर लागू व्यक्तिगत कानूनों के आधार पर होता है. आमतौर पर जीवनसाथी, बच्चे और कई मामलों में माता-पिता को पहला अधिकार मिलता है. कुछ स्थितियों में पोते-पोतियों को भी हिस्सा मिल सकता है. इसी वजह से कई परिवारों में विवाद या कन्फ्यूजन की स्थिति बन जाती है.

बैंक किन दस्तावेजों की मांग करता है?

बैंक आमतौर पर डेथ सर्टिफिकेट, पहचान पत्र, एफडी की जानकारी और कानूनी वारिस से जुड़े दस्तावेज मांगता है. छोटी रकम के मामलों में प्रक्रिया आसान हो सकती है, लेकिन बड़ी राशि होने पर बैंक ज्यादा मजबूत कानूनी सबूत मांग सकता है ताकि भविष्य में विवाद से बचा जा सके.

क्यों लग जाता है ज्यादा समय?

अगर परिवार में कई वारिस हैं, तो बैंक सभी की सहमति या एनओसी मांग सकता है. कई बार किसी एक सदस्य को सभी की ओर से दावा करने के लिए लिखित अनुमति लेनी पड़ती है. अगर परिवार में विवाद हो जाए या कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना पड़े, तो प्रक्रिया लंबी हो सकती है.

कैसे आसान बनाएं पूरा प्रोसेस?

सबसे पहले बैंक से संपर्क कर जरूरी दस्तावेजों की पूरी सूची समझ लें. परिवार के सभी सदस्यों से समय रहते बातचीत करें और जरूरी कागजात पहले से तैयार रखें. अगर सभी वारिस एकमत हों, तो क्लेम प्रक्रिया काफी तेज़ और आसान हो जाती है.

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