Last Updated Jan - 09 - 2026, 03:10 PM | Source : Fela News
एजुकेशन लोन से महंगी पढ़ाई आसान बन सकती है। सही कॉलेज, दस्तावेज़, ब्याज दर और मोरिटोरियम समझकर बिना रुकावट अपने करियर का सपना पूरा करें।
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पढ़ाई सिर्फ मेहनत का नहीं, बल्कि पैसों का भी बड़ा इम्तिहान बन चुकी है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट या विदेश में पढ़ाई - हर जगह फीस इतनी ज्यादा है कि कई बार मिडिल क्लास परिवारों की बचत कम पड़ जाती है। ऐसे में एजुकेशन लोन उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण बनता है, जो पढ़ाई बीच में छोड़ना नहीं चाहते। एजुकेशन लोन लेने की प्रक्रिया समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि बैंक सबसे पहले कॉलेज या यूनिवर्सिटी के नाम को अहमियत देते हैं। अगर छात्र को किसी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन मिला है, तो लोन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। टॉप कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लिए बैंक ज्यादा राशि, कम ब्याज दर और आसान शर्तों पर लोन देने को तैयार रहते हैं।
लोन के लिए आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज़ों की जरूरत होती है। इसमें एडमिशन लेटर, फीस स्ट्रक्चर, छात्र और को-एप्लिकेट (अक्सर माता-पिता) की आय से जुड़े दस्तावेज़, पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ शामिल होते हैं। विदेश में पढ़ाई के लिए पासपोर्ट, वीज़ा और यूनिवर्सिटी की ऑफर लेटर भी जरूरी होती है।
एजुकेशन लोन की एक बड़ी राहत होती है मोरिटोरियम पीरियड । इसका मतलब है कि पढ़ाई पूरी होने तक और उसके बाद कुछ समय तक छात्र को EMI नहीं चुकानी पड़ती। आमतौर पर यह अवधि कोर्स खत्म होने के बाद 6 महीने से 1 साल तक होती है। इस दौरान छात्र नौकरी ढूंढ सकता है और आर्थिक रूप से स्थिर हो सकता है।
ब्याज दर की बात करें तो यह बैंक, कोर्स और कॉलेज पर निर्भर करती है। सरकारी बैंकों में एजुकेशन लोन की ब्याज दर आमतौर पर कम होती है, जबकि प्राइवेट बैंकों में यह थोड़ी ज्यादा हो सकती है। हालांकि, कई बैंक पढ़ाई के दौरान ब्याज में छूट भी देते हैं।
एजुकेशन लोन का एक और बड़ा फायदा है टैक्स बेनिफिट आयकर कानून के तहत एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम हो जाता है।
एजुकेशन लोन सिर्फ पैसे का इंतजाम नहीं है, बल्कि यह छात्र को अपने सपनों की पढ़ाई पूरी करने का मौका देता है। सही कॉलेज का चुनाव, दस्तावेज़ों की तैयारी और शर्तों की समझ - इन तीन चीज़ों पर ध्यान देकर पढ़ाई को पैसों की वजह से रुकने से बचाया जा सकता है।