Last Updated Jun - 11 - 2026, 01:41 PM | Source : Fela News
पुलिस और समाज के जटिल रिश्तों को बेहद संवेदनशील अंदाज में दिखाती द नर्मदा स्टोरी इस शुक्रवार रिलीज हो रही है। दमदार कहानी, इमोशनल ड्रामा और सस्पेंस से भरपूर इस फिल्म का रिव्यू पढ़कर तय करें कि इसे देखना चाहिए या नहीं।
The Narmada Story Review आज के दौर में जब बड़े बजट और स्टारकास्ट वाली फिल्में भी दर्शकों को प्रभावित करने में नाकाम हो रही हैं, ऐसे समय में The Narmada Story एक सुखद आश्चर्य की तरह सामने आती है। सीमित बजट में बनी यह फिल्म कंटेंट, अभिनय और संवेदनशील कहानी के दम पर कई बड़ी फिल्मों को कड़ी टक्कर देती है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में पुलिस को किसी फिल्मी सुपरकॉप की तरह नहीं, बल्कि एक आम इंसान और वास्तविक पुलिस अधिकारी की तरह दिखाया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। यह सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के रिश्तों की गहराई को समझाने वाली फिल्म भी है।
कहानी: एक गुमशुदा पुलिसकर्मी और कई अनकही कहानियां
फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र से शुरू होती है, जहां एक पुलिस अधिकारी रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है। अपने ही विभाग के अधिकारी की तलाश में जुटी पुलिस को जांच के दौरान कई ऐसे किरदार मिलते हैं जो पहली नजर में अलग-अलग लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे एक ही कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।
कहानी में एक किन्नर है, एक ऐसी युवती है जो बोल और सुन नहीं सकती, एक महिला पुलिसकर्मी है जो घरेलू हिंसा का शिकार है और एक वरिष्ठ महिला अधिकारी है जो परिवार और ड्यूटी के बीच संघर्ष कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी कई सामाजिक मुद्दों को छूते हुए दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।
कैसी है फिल्म?
The Narmada Story शुरुआत से अंत तक दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है। फिल्म का सस्पेंस आपको लगातार यह जानने के लिए मजबूर करता है कि आखिर आगे क्या होने वाला है।
कहानी की सबसे बड़ी खूबी इसकी संवेदनशीलता है। घरेलू हिंसा से जूझ रही महिला कांस्टेबल का अपने डर पर जीत हासिल करना हो या आम लोगों के प्रति पुलिस के व्यवहार को लेकर उठाए गए सवाल, फिल्म कई स्तरों पर असर छोड़ती है।
फिल्म यह भी दिखाती है कि पुलिसकर्मी भी इंसान होते हैं। उनकी अपनी परेशानियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भावनात्मक संघर्ष होते हैं, जिनके बीच वे अपनी ड्यूटी निभाते हैं।
क्राइम थ्रिलर के साथ-साथ यह फिल्म समाज और पुलिस के रिश्तों पर भी गंभीर सवाल उठाती है। यही वजह है कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करती है।
अभिनय: हर कलाकार ने छोड़ी गहरी छाप
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका शानदार अभिनय है। मेन लीड में नजर आईं सिमाला प्रसाद वास्तविक जीवन में भी पुलिस अधिकारी हैं और उन्होंने अपने किरदार को पूरी सादगी और ईमानदारी के साथ निभाया है। उन्होंने कहीं भी फिल्मी बनने की कोशिश नहीं की और यही उनके अभिनय को खास बनाता है।
रघुबीर यादव अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ते हैं। उनके संवाद और भावनात्मक दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं।
मुकेश तिवारी, अश्विनी कालसेकर, इश्तियाक खान, अंजलि पाटिल, जरीना वहाब और आलोक चटर्जी जैसे कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को मजबूती दी है। खासतौर पर इश्तियाक खान ने किन्नर के किरदार में बेहतरीन अभिनय किया है।
राइटिंग और डायरेक्शन
फिल्म की कहानी जैगम इमाम, पंकज कौरव और आकाश तक ने लिखी है, जबकि निर्देशन की जिम्मेदारी जैगम इमाम ने संभाली है।
कहानी की पकड़ मजबूत है और स्क्रीनप्ले कहीं भी भटकता नहीं है। सीमित संसाधनों के बावजूद फिल्म का निर्देशन प्रभावशाली है। रियल लोकेशन्स पर शूटिंग होने की वजह से फिल्म में एक अलग तरह की प्रामाणिकता नजर आती है।
फिल्म देखते हुए कई बार महसूस होता है कि अगर यही कहानी किसी बड़े बैनर और बड़े बजट के साथ बनाई जाती, तो बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड बना सकती थी।
फैसला
अगर आप कंटेंट आधारित सिनेमा पसंद करते हैं, क्राइम थ्रिलर देखना पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं जो मनोरंजन के साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें, तो The Narmada Story आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)
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