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Raja Shivaji Review: सिर्फ फिल्म नहीं जज्बात है ‘राजा शिवाजी’, क्यों जरूर देखें?

Raja Shivaji Review: सिर्फ फिल्म नहीं जज्बात है ‘राजा शिवाजी’, क्यों जरूर देखें?

Last Updated May - 01 - 2026, 04:40 PM | Source : Fela News

Raja Shivaji Review: स्वराज्य की गूंज लेकर आई ‘राजा शिवाजी’ बड़े पर्दे पर छा गई है. रितेश देशमुख की भव्य प्रस्तुति में इतिहास, युद्ध और जज्बात का ऐसा संगम है जिसे मिस करना भारी पड़ सकता है.
सिर्फ फिल्म नहीं जज्बात है ‘राजा शिवाजी’
सिर्फ फिल्म नहीं जज्बात है ‘राजा शिवाजी’

Raja Shivaji Review: मराठी सिनेमा की सबसे चर्चित और सबसे महंगी फिल्मों में शामिल ‘राजा शिवाजी’ आखिरकार बड़े पर्दे पर आ चुकी है, और यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि स्वराज्य की धड़कन है. करीब 100 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस, युद्ध नीति और जनता के लिए लड़े गए संघर्ष को भव्यता के साथ पेश करती है. हिंदी में रिलीज होने की वजह से अब यह कहानी सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश के दर्शकों तक पहुंच रही है.

कहानी में है इतिहास का गर्व

फिल्म की शुरुआत उस दौर से होती है जब दक्कन की धरती पर अन्याय, लूट और सत्ता की क्रूरता हावी थी. मुगलों, निजामशाही और आदिलशाही के बीच पिसती जनता के दर्द से एक ऐसी चिंगारी निकलती है, जिसे मां जिजाऊ स्वराज्य के संकल्प में बदल देती हैं. यही चिंगारी आगे चलकर छत्रपति शिवाजी महाराज बनती है. फिल्म अफजल खान प्रकरण, स्वाभिमान की लड़ाई और जनता के लिए खड़े हुए एक योद्धा की गाथा को बेहद दमदार तरीके से दिखाती है.

रितेश देशमुख ने जी लिया किरदार

रितेश देशमुख ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि शिवाजी महाराज को पर्दे पर महसूस कराया है. उनके चेहरे का आत्मविश्वास, युद्ध के समय की दृढ़ता और मां के सामने भावुकता—हर फ्रेम में मेहनत दिखती है. एक निर्देशक के तौर पर भी उन्होंने कहानी को भटकने नहीं दिया. साफ नजर आता है कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, श्रद्धा का विषय थी.

भव्यता, संगीत और युद्ध दृश्य हैं फिल्म की जान

फिल्म का विजुअल स्केल शानदार है. विशाल किले, तलवारों की टकराहट, घुड़सवार सेना और युद्ध के सीन थिएटर में रोमांच पैदा करते हैं. अजय-अतुल का बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों को रोंगटे खड़े कर देने वाला बना देता है. संतोष सिवन की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर का टच देती है.

क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म?

क्योंकि यह सिर्फ इतिहास सुनाती नहीं, इतिहास का स्वाभिमान जगाती है. ‘राजा शिवाजी’ आपको बताती है कि स्वराज्य किसी सिंहासन से नहीं, जनता के दर्द से जन्म लेता है. आज के दौर में ऐसी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि गर्व का एहसास भी कराती हैं.

फाइनल वर्डिक्ट

अगर आप भव्य युद्ध, दमदार अभिनय और देशभक्ति से भरी कहानी देखना चाहते हैं, तो ‘राजा शिवाजी’ मिस नहीं करनी चाहिए. यह फिल्म थिएटर में देखने लायक एक इमोशनल और विजुअल अनुभव है. 

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