Last Updated Jun - 01 - 2026, 01:37 PM | Source : Fela News
Suman Kalyanpur Death: सुरों की दुनिया से एक युग का अंत हो गया। 'ना ना करते प्यार' समेत कई सदाबहार गीतों को आवाज देने वाली दिग्गज प्लेबैक सिंगर सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने से संगीत जगत शोक में डूब गया है
भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी मधुर और दिल को छू लेने वाली आवाज से करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज प्लेबैक सिंगर सुमन कल्याणपुर अब हमारे बीच नहीं रहीं। 89 वर्ष की उम्र में 31 मई को उनका निधन हो गया। उनके जाने से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और फैंस से लेकर फिल्मी व राजनीतिक हस्तियां उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रही हैं।
छह दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर किया राज
सुमन कल्याणपुर ने अपने शानदार करियर में 800 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी। "आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे", "ना ना करते प्यार तुम्हीं से", "तुमने पुकारा और हम चले आए", "ना तुम हमें जानो" और "परबतों के पेड़ों पर" जैसे सदाबहार गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं। हिंदी के साथ-साथ मराठी संगीत जगत में भी उनका योगदान बेहद अहम रहा।
उनके मराठी गीत "केतकीच्या बानी तिथे", "सांग कधी कळणार तुला" और "निंबोण्याच्या झाडामागे" आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी आवाज की मिठास और भावपूर्ण गायकी ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल कर दिया।
बॉलीवुड से लेकर राजनीति जगत तक शोक
सुमन कल्याणपुर के निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड, संगीत और राजनीति जगत की कई हस्तियों ने दुख जताया। वरिष्ठ नेता शरद पवार ने कहा कि उनके निधन से भारतीय संगीत के स्वर्णिम दौर का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।
वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुमन कल्याणपुर की आवाज हमेशा भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक सुमन जी ने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों को छुआ।
मोहम्मद रफी के साथ सुपरहिट रही जोड़ी
सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफी की जोड़ी को हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय गायन जोड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने साथ मिलकर कई ऐसे गीत दिए जो आज भी सदाबहार माने जाते हैं। उनकी गायकी में भावनाओं की गहराई और सुरों की मिठास साफ झलकती थी।
लता मंगेशकर जैसी आवाज, लेकिन बनाई अलग पहचान
सुमन कल्याणपुर की आवाज को अक्सर लता मंगेशकर की आवाज से मिलती-जुलती बताया जाता था। कई बार श्रोता दोनों की आवाज में फर्क नहीं कर पाते थे। इसके बावजूद सुमन ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और अलग अंदाज के दम पर संगीत जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई।
ढाका से मुंबई तक का प्रेरणादायक सफर
28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका में जन्मीं सुमन कल्याणपुर ने मुंबई में अपनी पढ़ाई पूरी की। शुरुआत में उन्होंने चित्रकला की पढ़ाई की और सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया, लेकिन संगीत के प्रति लगाव उन्हें सुरों की दुनिया में ले आया।
उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और उस्ताद नवरंग जैसे गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर भारतीय संगीत की सबसे सम्मानित आवाजों में शुमार हो गईं।
पद्म भूषण से हुई थीं सम्मानित
भारतीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से भी नवाजा गया था। फिल्मों के अलावा उन्होंने भजन, ग़ज़ल, मराठी अभंग और भावगीतों में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा।
सुमन कल्याणपुर भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और उनके अमर गीत आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।
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