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Brain Health: मोबाइल की लत बना रही दिमाग कमजोर, डॉक्टरों ने चेताया खतरा

Brain Health: मोबाइल की लत बना रही दिमाग कमजोर, डॉक्टरों ने चेताया खतरा

Last Updated May - 29 - 2026, 01:15 PM | Source : Fela News

Cognitive Fatigue: देर रात मोबाइल चलाना दिमाग और नींद दोनों पर भारी पड़ रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक लगातार स्क्रॉलिंग से ब्रेन को आराम नहीं मिलता, जिससे थकान, तनाव और नींद की गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं
मोबाइल की लत बना रही दिमाग कमजोर
मोबाइल की लत बना रही दिमाग कमजोर

How Screen Time Affects Brain Health: आज की डिजिटल जिंदगी में इंसान का दिमाग शायद ही कभी सच में आराम कर पाता है. पहले लोग सफर के दौरान बाहर का नजारा देखते थे, इंतजार के समय आसपास की चीजों को महसूस करते थे और रात में सोने से पहले दिमाग खुद शांत हो जाता था. लेकिन अब हर खाली पल मोबाइल स्क्रीन, नोटिफिकेशन, वीडियो और सोशल मीडिया से भर चुका है. यही वजह है कि लोग बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत किए भी लगातार मानसिक थकान महसूस करने लगे हैं.

न्यूरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि लगातार मिलने वाला डिजिटल स्टिमुलेशन इंसानी दिमाग के काम करने के तरीके को धीरे-धीरे बदल रहा है. बाहर से देखने पर भले इंसान आराम करता नजर आए, लेकिन उसका दिमाग लगातार नई जानकारी प्रोसेस करता रहता है. यही कारण है कि आजकल लोगों में थकान, चिड़चिड़ापन, भूलने की समस्या और ध्यान की कमी तेजी से बढ़ रही है. कई लोग सुबह उठने के बाद भी खुद को फ्रेश महसूस नहीं कर पाते.

होसमैट हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रभु के मुताबिक इंसानी दिमाग कभी भी 24 घंटे एक्टिव रहने के लिए नहीं बना था. पहले दिनभर में ऐसे कई छोटे पल मिल जाते थे, जब दिमाग खुद शांत हो जाता था. लेकिन अब स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और हर समय जुड़े रहने का दबाव दिमाग को लगातार अलर्ट मोड में बनाए रखता है. यही वजह है कि लोग आराम के समय भी पूरी तरह रिलैक्स महसूस नहीं कर पाते.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लोगों को लगता है कि देर रात मोबाइल स्क्रॉल करना या वीडियो देखना आराम देता है, जबकि असल में दिमाग लगातार एक्टिव रहता है. धीरे-धीरे यही आदत मानसिक थकान, फोकस की कमी, एंग्जायटी और इमोशनल बर्नआउट में बदल सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम और देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी, इमोशनल बैलेंस और ध्यान लगाने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है.

डॉक्टरों के मुताबिक लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग को मिलने वाला ‘रेस्ट मोड’ खत्म होने लगता है. यही कारण है कि आजकल कम उम्र के लोग भी तनाव, माइग्रेन और नींद की समस्याओं से जूझ रहे हैं. खासतौर पर देर रात की लगातार स्क्रॉलिंग दिमाग को अलर्ट मोड में बनाए रखती है, जिससे शरीर को गहरी नींद नहीं मिल पाती.

अरेटे हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुरेश बाबू पी के अनुसार, गहरी नींद के दौरान दिमाग का ‘ग्लिम्फैटिक सिस्टम’ शरीर में जमा जहरीले मेटाबॉलिक पदार्थों को साफ करता है. लेकिन देर रात स्क्रीन देखने और नींद पूरी न होने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है.

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि रोज कम से कम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लें, सोने से एक घंटा पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएं और दिन में कुछ समय बिना किसी डिजिटल डिवाइस के बिताएं, ताकि दिमाग को सही मायनों में आराम मिल सके.

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