Last Updated Jun - 01 - 2026, 03:23 PM | Source : Fela News
Multiple Sclerosis In India: बार-बार थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट और कमजोरी को नजरअंदाज न करें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जो युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रही है।
Early Symptoms Of Multiple Sclerosis In Young Adults: अक्सर लोग हाथ-पैरों में झनझनाहट, बार-बार थकान, चक्कर आना या कुछ समय के लिए धुंधला दिखने जैसी समस्याओं को सामान्य कमजोरी, तनाव या पोषण की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।
भारत में आज भी इस बीमारी के कई मामले समय पर सामने नहीं आ पाते, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं। यही वजह है कि कई मरीज सही बीमारी का पता चलने से पहले वर्षों तक इलाज के लिए भटकते रहते हैं।
क्या है मल्टीपल स्क्लेरोसिस?
मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से नसों की सुरक्षा करने वाली परत पर हमला करने लगती है। इससे दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।
समय के साथ यह बीमारी चलने-फिरने, देखने, संतुलन बनाने और शरीर की सामान्य गतिविधियों पर असर डाल सकती है।
ये शुरुआती लक्षण हो सकते हैं खतरनाक संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए—
संतुलन बनाने में परेशानी
कई बार ये लक्षण कुछ दिनों या हफ्तों बाद अपने आप कम हो जाते हैं, जिससे मरीज को लगता है कि समस्या खत्म हो गई है। लेकिन यही बीमारी की पहचान में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
क्यों देर से पकड़ में आती है बीमारी?
न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक MS के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को नजर से जुड़ी समस्या होती है, किसी को कमजोरी महसूस होती है, तो किसी को शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन का अनुभव होता है।
लक्षणों की यही विविधता बीमारी की पहचान को मुश्किल बना देती है। कई मरीज तब तक विशेषज्ञ डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते, जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती।
20 से 40 साल के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी सबसे अधिक 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में देखी जाती है। महिलाओं में इसके मामले पुरुषों की तुलना में ज्यादा पाए जाते हैं।
इस आयु वर्ग के लोग अक्सर थकान, कमजोरी या चक्कर आने को काम का दबाव, तनाव या लाइफस्टाइल से जोड़ देते हैं, जिससे बीमारी का पता लगाने में देरी हो जाती है।
भारत में बढ़ रहे हैं मामले
पहले यह माना जाता था कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस भारत में बहुत कम लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन बेहतर जांच सुविधाओं और जागरूकता बढ़ने के बाद अब इसके अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
हालांकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक जांच सुविधाओं की कमी के कारण आज भी कई मरीज समय पर सही इलाज नहीं प्राप्त कर पाते।
एक्सपर्ट की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हाथ-पैरों में झनझनाहट, लगातार थकान, धुंधला दिखना या बार-बार चक्कर आने जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो इन्हें सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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