Last Updated Jun - 13 - 2026, 03:28 PM | Source : Fela News
Sleep Cycle For Women: क्या आपकी देर रात तक जागने की आदत बन रही है मां बनने में बाधा? एक्सपर्ट्स के अनुसार रात 11 बजे के बाद जागना महिलाओं के हार्मोन, ओव्यूलेशन और फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
Sleep Cycle For Women:आज की व्यस्त जीवनशैली में महिलाएं अक्सर घर, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी नींद को सबसे पीछे रख देती हैं। देर रात तक मोबाइल चलाना, ऑफिस का काम निपटाना या घरेलू कामों में व्यस्त रहना अब आम बात बन चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि महिलाओं के हार्मोनल संतुलन, पीरियड्स और मां बनने की क्षमता पर भी गंभीर असर डाल सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि रात 11 बजे से पहले सोना महिलाओं की प्रजनन सेहत के लिए बेहद जरूरी है। लगातार देर रात तक जागने और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर के कई महत्वपूर्ण हार्मोन प्रभावित होते हैं, जिसका असर भविष्य में गर्भधारण की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
नींद और हार्मोन का गहरा कनेक्शन
विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में नींद और हार्मोन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। सिर्फ कितने घंटे सोना जरूरी है, यह ही नहीं बल्कि किस समय सोया जाए, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दिमाग का वही हिस्सा जो नींद और जागने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, महिलाओं में ओव्यूलेशन यानी अंडाणु बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। ओव्यूलेशन शुरू करने वाला हार्मोन एलएच (LH - Luteinizing Hormone) गहरी नींद के दौरान बनता है। यदि नींद बार-बार टूटती है या पर्याप्त नहीं होती, तो इस हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित होने और ओव्यूलेशन में रुकावट आने का खतरा बढ़ जाता है।
कम नींद से बिगड़ सकता है पूरा हार्मोनल सिस्टम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नींद न मिलने से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, एलएच (LH) और एफएसएच (FSH) जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है।
इनमें मेलाटोनिन हार्मोन अंडाणुओं की गुणवत्ता को बनाए रखने और उन्हें सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन देर रात तक जागने की आदत इसकी मात्रा को कम कर सकती है।
वहीं दूसरी ओर, नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल यानी तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। कोर्टिसोल बढ़ने पर दिमाग और अंडाशय (Ovary) के बीच का तालमेल प्रभावित होता है, जिससे एलएच और एफएसएच हार्मोन का सामान्य स्राव बाधित हो सकता है। यही हार्मोन अंडों के विकास और सही समय पर उनके रिलीज होने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार कम नींद लेने वाली महिलाओं में गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडाणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है।
महिलाओं को कितनी नींद लेनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद जरूर लेनी चाहिए। American Society of Reproductive Medicine की एक स्टडी में भी पाया गया कि जो महिलाएं 7 से 8 घंटे की नियमित नींद लेती हैं, उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जो बहुत कम या बहुत ज्यादा सोती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिलाओं को रात 11 बजे तक सो जाने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि यही समय शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सबसे अधिक मददगार माना जाता है।
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