Last Updated May - 28 - 2025, 02:40 PM | Source : Fela News
अब भारत में लोग पहले की तुलना में अधिक संख्या में दिल की बीमारियों और डायबिटीज़ से जान गंवा रहे हैं, जबकि मलेरिया, डायरिया और टीबी जैसी बीमारियों से होने वाली म
भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी मौतों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) और मधुमेह से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जिन बीमारियों से भारत जूझ रहा था—जैसे मलेरिया, डायरिया, टीबी और नवजात शिशुओं से जुड़ी समस्याएं—उनसे होने वाली मौतों में अब गिरावट दर्ज की गई है
हालांकि एक चिंता की बात यह भी सामने आई है कि अज्ञात बुखार (fevers of unknown origin) से मरने वालों का अनुपात भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। इसका मतलब है कि कई बार बीमारी की पहचान ही नहीं हो पाती, और मरीज समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं
इसके विपरीत, कैंसर से होने वाली मौतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से कैंसर के मामलों में स्थिरता बनी हुई है, यानी न इनमें खास बढ़ोतरी हुई है, न ही गिरावट
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, तनाव, खराब खानपान और कम फिजिकल एक्टिविटी की वजह से दिल और डायबिटीज़ से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की ओर से मलेरिया, टीबी और डायरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ चलाए गए अभियान असरदार साबित हुए हैं, जिससे उन बीमारियों से मौतों में कमी आई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भारत को न सिर्फ पारंपरिक बीमारियों से निपटना है, बल्कि नई तरह की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। जागरूकता, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार ही इसका प्रमुख समाधान है।