Last Updated Feb - 05 - 2026, 01:03 PM | Source : Fela News
दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहने वाले मुंह के घावों पर चिकित्सकीय सतर्कता जरूरी बताई गई है। विशेषज्ञों ने शुरुआती जांच और जोखिम कारकों की पहचान पर जोर दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुंह में होने वाले छोटे घाव या छाले, यदि दो सप्ताह के भीतर ठीक नहीं होते, तो उन्हें सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसे लगातार बने रहने वाले घाव ओरल कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हालांकि सभी मामलों में कैंसर की पुष्टि नहीं होती, लेकिन समय रहते जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।
सूत्रों के अनुसार तंबाकू सेवन, धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन और खराब ओरल हाइजीन को प्रमुख जोखिम कारकों में गिना गया है। दंत एवं कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक रहने वाले घावों के साथ यदि दर्द, खून आना, गांठ बनना या निगलने में कठिनाई जैसे लक्षण भी हों, तो तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार की सफलता दर अधिक रहती है।
बताया जा रहा है कि कई लोग मुंह के छालों को सामान्य अल्सर समझकर घरेलू उपचार तक सीमित रहते हैं, जिससे निदान में देरी हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत लगातार रेखांकित की जा रही है, विशेषकर उच्च जोखिम समूहों में।
इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नियमित डेंटल चेकअप, तंबाकू त्याग और संतुलित आहार को बचाव के प्रमुख उपायों में शामिल किया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में ओरल कैंसर की शुरुआती जांच सुविधाएं पर्याप्त हैं, क्योंकि देर से पहचान मामलों को जटिल बना देती है।
डॉक्टरों का कहना है कि मुंह में किसी भी असामान्य बदलाव, रंग परिवर्तन या न भरने वाले घाव को गंभीरता से लेना चाहिए। समय पर बायोप्सी और क्लिनिकल जांच से रोग की पुष्टि संभव है। फिलहाल विशेषज्ञों का जोर इसी बात पर है कि दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहने वाले घावों को साधारण समस्या मानने के बजाय चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना जरूरी है
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