Last Updated Feb - 03 - 2026, 06:13 PM | Source : Fela News
पूरी नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल के बावजूद दोपहर में सुस्ती महसूस होना विटामिन D की कमी का संकेत हो सकता है । धूप, डाइट और सप्लीमेंट से सुधार संभव।
दोपहर होते-होते अचानक थकान, सुस्ती और नींद-सी आने की शिकायत आजकल बेहद आम हो गई है। कई लोग पर्याप्त नींद लेते हैं, नियमित एक्सरसाइज करते हैं और हेल्दी डाइट भी फॉलो करते हैं, फिर भी दोपहर के बाद शरीर में ऊर्जा का स्तर अचानक गिर जाता है। इसे अक्सर काम के दबाव, उम्र या मानसिक थकान मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसके पीछे एक अहम पोषक तत्व - विटामिन D की कमी छिपी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन D केवल हड्डियों और कैल्शियम के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया से भी गहराई से जुड़ा है। जब शरीर में इसका स्तर कम हो जाता है, तो कोशिकाएं प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पातीं। परिणामस्वरूप, दिन के बीच में ही व्यक्ति खुद को थका हुआ, बोझिल और ऊर्जा विहीन महसूस करने लगता है। सामान्य रूप से विटामिन D का स्वस्थ स्तर 20 से 50 ng/mL के बीच माना जाता है, लेकिन बड़ी आबादी इससे नीचे पाई जा रही है।
यह स्थिति भारत जैसे धूप वाले देश में और भी चौंकाने वाली है । शहरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, प्रदूषण के कारण धूप की अल्ट्रावायलेट किरणों का कमजोर होना और धूप से बचने की आदत - ये सभी कारण विटामिन D की कमी को बढ़ाते हैं। शरीर में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया, जिन्हें ऊर्जा की फैक्ट्री कहा जाता है, विटामिन D पर निर्भर रहते हैं। इसकी कमी होने पर एटीपी (ATP) यानी ऊर्जा की मूल इकाई का निर्माण प्रभावित होता है।
दोपहर की थकान का संबंध हार्मोनल बदलावों से भी है। दिन के इस हिस्से में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर स्वाभाविक रूप से गिरता है। यदि विटामिन D की कमी हो, तो शरीर इस बदलाव को संतुलित नहीं कर पाता। यही कारण है कि दोपहर 2 से 4 बजे के बीच सुस्ती ज्यादा महसूस होती है। इसके अलावा, विटामिन D सेरोटोनिन के निर्माण में भी मदद करता है, जो मूड और ऊर्जा को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से व्यक्ति न केवल थका हुआ महसूस करता है, बल्कि मानसिक रूप से भी धीमा पड़ सकता है।
सर्केडियन रिदम यानी शरीर की जैविक घड़ी भी इसमें भूमिका निभाती है। हल्की थकान इस समय सामान्य मानी जाती है, लेकिन जब विटामिन D का स्तर कम हो, तो यह सामान्य थकान गहरी सुस्ती में बदल जाती है। व्यक्ति को नींद-सी आने लगती है और काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, केवल विटामिन D ही जिम्मेदार नहीं है। भारी और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला लंच, पानी की कमी, प्रोटीन का कम सेवन और लंबे समय तक बैठे रहना भी दोपहर की थकान को बढ़ा सकता है। लेकिन यदि यह समस्या रोजाना हो रही है, तो विटामिन D स्तर की जांच कराना जरूरी हो जाता है।
इस समस्या से निपटने के लिए डॉक्टरों की सलाह पर विटामिन D सप्लीमेंट लेना, रोजाना 15-20 मिनट धूप में रहना, संतुलित भोजन लेना और लंच के बाद हल्की वॉक करना फायदेमंद साबित हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि हर थकान नींद की कमी से नहीं होती; कभी-कभी यह शरीर की पोषण जरूरतों का संकेत भी होती है। समय रहते इस पर ध्यान देने से दिनभर की ऊर्जा और कार्यक्षमता दोनों में सुधार लाया जा सकता है।
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