Last Updated Dec - 13 - 2025, 03:00 PM | Source : Fela News
कैंसर को राष्ट्रीय अधिसूचित बीमारी घोषित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया
देश में तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कैंसर को देशव्यापी यानी राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित बीमारी घोषित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस कदम को स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
यह मामला एक याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, जिसमें कहा गया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को अब भी राष्ट्रीय स्तर पर नोटिफायबल डिजीज घोषित नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अगर कैंसर को अधिसूचित बीमारी बनाया जाता है, तो इसके मामलों की सही रिपोर्टिंग, निगरानी और इलाज की व्यवस्था ज्यादा मजबूत हो सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों से पूछा है कि इस मांग पर उनका क्या रुख है और अब तक कैंसर को राष्ट्रीय बीमारी घोषित क्यों नहीं किया गया। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि कैंसर के आंकड़ों को इकट्ठा करने और इलाज की योजनाओं को लागू करने में मौजूदा सिस्टम कितना प्रभावी है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कैंसर को अधिसूचित बीमारी बनाने से मरीजों को समय पर इलाज, सरकारी योजनाओं का लाभ और बेहतर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सकेगा। इसके अलावा इससे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में कैंसर की पहचान और रिपोर्टिंग आसान हो सकती है।
फिलहाल भारत में टीबी, कोविड जैसी कुछ बीमारियां अधिसूचित हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होती है। लेकिन कैंसर के मामले अलग-अलग रजिस्ट्रियों और अस्पतालों तक सीमित रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर इसे अधिसूचित करने से बीमारी से लड़ने की रणनीति ज्यादा प्रभावी बन सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब सभी की नजर केंद्र और राज्यों के जवाब पर टिकी है। यह मामला आगे चलकर देश की कैंसर नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा तय कर सकता है।
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