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मुंहासे क्यों बार-बार आते हैं? आयुर्वेद बताता है पेट का सच

मुंहासे क्यों बार-बार आते हैं? आयुर्वेद बताता है पेट का सच

Last Updated Feb - 07 - 2026, 11:56 AM | Source : Fela News

बार-बार चेहरे पर मुंहासे निकलना सिर्फ स्किन की समस्या नहीं हो सकती। आयुर्वेद के अनुसार खराब पाचन, बढ़ा पित्त और वात इसका बड़ा कारण बन सकते हैं।
मुंहासे क्यों बार-बार आते हैं?
मुंहासे क्यों बार-बार आते हैं?

आज के समय में चेहरे पर मुंहासे होना एक बेहद आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या बन चुकी है। किशोरों से लेकर वयस्कों तक, पुरुष हों या महिलाएं- हर उम्र के लोग इससे जूझ रहे हैं। लोग महंगे फेसवॉश, क्रीम और ट्रीटमेंट आजमाते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद पिंपल्स फिर लौट आते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मुंहासे सिर्फ बाहरी त्वचा की समस्या हैं, या इसके पीछे शरीर के अंदर, खासकर पेट से जुड़ी कोई गड़बड़ी छिपी है? 

आयुर्वेद इस सवाल का जवाब बहुत साफ देता है। आयुर्वेद के अनुसार, त्वचा पर दिखने वाली अधिकतर समस्याओं की जड़ पेट और पाचन तंत्र में होती है। जब खाना ठीक से नहीं पचता, कब्ज, गैस, एसिडिटी या टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, तो शरीर इन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है— और इसका असर चेहरे पर मुंहासों के रूप में दिखता है। 

जयपुर की क्लीनिकल आयुर्वेद एक्सपर्ट Kiran Gupta बताती हैं कि मुंहासों का सीधा संबंध वात और पित्त दोष से होता है। जब शरीर में पित्त ज्यादा बढ़ जाता है, तो गर्मी, जलन और सूजन बढ़ती है, जिससे चेहरे पर लाल और दर्दनाक मुंहासे निकलते हैं। वहीं वात बढ़ने से रूखापन, गैस और पाचन की गड़बड़ी होती है, जिसका असर भी स्किन पर दिखाई देता है। एक्सपर्ट के अनुसार, जिन लोगों को बार-बार मुंहासे होते हैं, उनमें अक्सर कब्ज, एसिडिटी या अनियमित पाचन की समस्या पाई जाती है। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, खासकर अनियमित पीरियड्स भी मुंहासों की बड़ी वजह बन सकता है। इसके अलावा ज्यादा तला-भुना, तीखा, मसालेदार और बाहर का खाना पित्त को और बढ़ा देता है। 

पानी की कमी भी एक बड़ा कारण है। अगर आप अच्छा खाना खा रहे हैं लेकिन पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो शरीर के टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते और वही त्वचा पर मुंहासों के रूप में दिखते हैं। आयुर्वेद मानता है कि “पेट को ठंडा रखना " स्किन को साफ रखने के लिए बेहद जरूरी है। 

बढ़े वात और पित्त को कैसे करें बैलेंस 

वात और पित्त को संतुलित करने के लिए आयुर्वेद में आहार और दिनचर्या पर खास जोर दिया जाता है। ठंडक देने वाला, हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे चावल, मूंग दाल, लौकी, तोरी, खीरा, दूध और घी को डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है। वहीं ज्यादा तीखा, खट्टा, तला-भुना, चाय-कॉफी और शराब से दूरी बनानी चाहिए। समय पर खाना, पूरी नींद और हल्की एक्सरसाइज भी बेहद जरूरी है। 

मुंहासों को कम करने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय 

नीम की पत्तियां मुंहासों में काफी असरदार मानी जाती हैं। नीम की पत्तियों को उबालकर ठंडा पानी दिन में 1-2 बार चेहरे पर इस्तेमाल करें। एलोवेरा जेल भी सूजन और दाग-धब्बे कम करने में मदद करता है। रात में ताजा एलोवेरा जेल मुंहासों पर लगाने से राहत मिल सकती है। 

इसके अलावा चंदन पाउडर में चुटकी भर हल्दी और गुलाब जल मिलाकर बनाया गया लेप हफ्ते में दो बार लगाने से मुंहासे धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। 

कुल मिलाकर, अगर आपके चेहरे पर बार-बार मुंहासे निकलते हैं, तो सिर्फ स्किन प्रोडक्ट्स पर निर्भर न रहें। पेट की सेहत, पाचन और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। आयुर्वेद की मानें तो जब पेट साफ और संतुलित रहेगा, तभी चेहरा भी साफ और निखरा नजर आएगा। 

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