Last Updated Jun - 03 - 2025, 11:12 AM | Source : Fela News
उत्तर प्रदेश के कौशांबी के रहने वाले लखन लाल को हत्या के झूठे केस में उम्रकैद की सजा मिली थी, लेकिन 43 साल बाद कोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी ज़िले के निवासी 104 वर्षीय लखन लाल को 43 साल बाद न्याय मिला है। हत्या और हत्या की कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे लखन लाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
यह मामला 1977 का है, जब गांव के ही प्रभु पासी की हत्या के मामले में लखन लाल को आरोपी बनाया गया था। 1982 में जिला अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन लखन लाल ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हालांकि हाईकोर्ट से राहत मिलने के बावजूद, तकनीकी कारणों के चलते उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया। उनके परिवार ने लगातार न्याय के लिए लड़ाई जारी रखी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, मुख्यमंत्री, कानून मंत्री और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से भी मदद मांगी।
अंततः ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव पूर्णिमा प्रांजल और कानूनी सलाहकार अंकित मौर्य ने मामले को गंभीरता से लिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी शिकायत भेजी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने लखन लाल की तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
इस आदेश के बाद मंगलवार को लखन लाल को आखिरकार जेल से रिहा किया गया। यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत को एक बार फिर उजागर करता है, जहां एक निर्दोष को चार दशकों से ज़्यादा वक्त तक जेल में रहना पड़ा।