Last Updated Aug - 06 - 2025, 04:22 PM | Source : Fela News
6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया। लाखों मरे, शहर खाक हुआ। आज भी इसकी तबाही मानवता को डर और दर्द की याद दिलाती है।
6 अगस्त 1945 की सुबह 8:15 बजे, जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया गया था। इस विनाशकारी हमले में तत्काल करीब 70,000 लोगों की मौत हो गई, और साल के अंत तक यह आंकड़ा 1,40,000 के करीब पहुंच गया। आज इस त्रासदी के 80 साल पूरे हो चुके हैं।
6 अगस्त 1945 — यह तारीख इतिहास में उस भयावह दिन के रूप में दर्ज है जब इंसान ने पहली बार परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया। सुबह 8:15 बजे अमेरिका द्वारा गिराया गया 'लिटिल बॉय' नाम का बम जापान के हिरोशिमा शहर पर फटा। विस्फोट के तुरंत बाद ही करीब 70,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि अगले कुछ महीनों में रेडिएशन और गंभीर चोटों से मरने वालों की संख्या 1,40,000 तक पहुंच गई।
तीन दिन बाद, 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने दूसरा परमाणु बम नागासाकी पर गिराया, जिसमें लगभग 40,000 लोग मारे गए। इन दोनों हमलों ने द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त करने में भूमिका निभाई, लेकिन इसके साथ ही दुनिया को ऐसे जख्म दिए जो आज भी भरे नहीं हैं।
आज जापान और पूरी दुनिया उस दिन को मानवता की सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में याद कर रही है। हिरोशिमा में पीस मेमोरियल पार्क में लाखों लोग मोमबत्तियां जलाकर, शांति की प्रार्थना करके और मौन रखकर उन निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जो इस बमबारी के शिकार बने।
इस घटना ने न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि विज्ञान का इस्तेमाल यदि युद्ध और विनाश के लिए किया जाए, तो उसका अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। आज, जब वैश्विक तनाव और परमाणु हथियारों की होड़ फिर चर्चा में है, हिरोशिमा और नागासाकी हमें शांति और विवेक की सबसे जरूरी सीख देते हैं।
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