Last Updated Oct - 24 - 2025, 04:50 PM | Source : Fela News
प्रसिद्ध एड गुरु पीयूष पांडे का निधन, विज्ञापन और क्रिएटिव इंडस्ट्री के एक युग का अंत। उनके काम ने कई ब्रांड्स और युवा क्रिएटिव्स को दिशा दी।
भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज नाम पीयूष पांडे का निधन हो गया है। 69 वर्षीय पांडे ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में विज्ञापन की भाषा और सोच को नया रूप दिया था। उनके जाने से क्रिएटिव इंडस्ट्री में शोक की लहर है , उन्हें वह व्यक्ति माना जाता है जिसने भारतीय विज्ञापन को “दिल से जुड़ा” बनाया।
पीयूष पांडे ने अपने करियर में अनगिनत यादगार कैंपेन दिए। ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’, ‘चक दे इंडिया’, ‘हर घर कुछ कहता है’, और ‘फेवीकॉल का मजबूत जोड़’ जैसे विज्ञापन आज भी लोगों की यादों में बसे हैं। उनके बनाए विज्ञापन सिर्फ उत्पाद नहीं बेचते थे, बल्कि भावनाओं को छूते थे।
एक समय था जब भारतीय विज्ञापन पश्चिमी स्टाइल की नकल में फंसे हुए थे, लेकिन पीयूष पांडे ने इसमें भारतीयता का रंग भरा। उनकी सोच थी कि विज्ञापन तभी असर करेगा जब वो आम आदमी की भाषा बोले। यही कारण था कि उनकी हर लाइन, हर संवाद में अपनापन झलकता था।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया है। फिल्म जगत, कॉर्पोरेट सेक्टर और मीडिया जगत के लोगों ने उन्हें “विज्ञापन का कवि” और “आइडिया का जादूगर” कहकर याद किया। ओगिल्वी इंडिया में उन्होंने दशकों तक काम किया और उसे भारत की सबसे क्रिएटिव एजेंसियों में से एक बनाया।
पीयूष पांडे का जाना सिर्फ एक शख्सियत का खोना नहीं, बल्कि भारतीय विज्ञापन की आत्मा का जाना है। उन्होंने दिखाया कि एक अच्छा आइडिया नारा नहीं, बल्कि एक भावना होता है ,जो दिलों में बस जाती है। आज उनके शब्द और उनके बनाए दृश्य शायद पहले से ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि उन्होंने हर भारतीय को अपनी कहानी में शामिल किया था।