Last Updated Jun - 21 - 2025, 12:09 PM | Source : Fela News
एयर इंडिया Boeing 787 हादसे में ब्लैक बॉक्स अमेरिका भेजा गया क्योंकि दिल्ली की नई लैब में डेटा रिकवरी संभव नहीं थी। जांच तकनीक की सीमाएँ और क्षमता पर सवाल उभर र
Air India के एक Boeing 787 विमान की दर्दनाक दुर्घटना के बाद अब जांच का फोकस ब्लैक बॉक्स पर टिक गया है। दुर्घटना में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे भारत में इनका डेटा निकालना संभव नहीं हो सका। ऐसे में अब यह ब्लैक बॉक्स जांच के लिए अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) को भेजा गया है।
हालांकि भारत के पास खुद का एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) है, जिसमें ब्लैक बॉक्स विश्लेषण की सुविधा मौजूद है, लेकिन फिलहाल इतने गंभीर रूप से जले हुए उपकरणों की डिकोडिंग की तकनीक भारत के पास उपलब्ध नहीं है।
हादसे की गुत्थी सुलझाने में मदद करेगा डेटा
NTSB की अत्याधुनिक तकनीक से ब्लैक बॉक्स के अंदर मौजूद बचे हुए डेटा को पढ़ा जाएगा, जिससे यह जानने में मदद मिलेगी कि विमान के आखिरी क्षणों में क्या हुआ। यह डेटा दुर्घटना के कारणों की तह तक जाने में अहम भूमिका निभाएगा।
क्या भारत इस स्तर की जांच के लिए तैयार है?
इस घटनाक्रम ने भारत की विमानन सुरक्षा जांच क्षमताओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या देश को अब इस तरह की हाई-इंटेंसिटी दुर्घटनाओं की जांच के लिए और अधिक तकनीकी सशक्तिकरण की जरूरत है?
ब्लैक बॉक्स जैसे क्रिटिकल उपकरणों को पढ़ने के लिए विदेशों पर निर्भरता सिर्फ तकनीकी सीमा नहीं, बल्कि विमानन सुरक्षा स्वावलंबन पर भी एक गंभीर बहस को जन्म देती है।