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बीएमसी चुनाव के बाद शिंदे गुट में नाराजगी, पार्षदों के प्रमाण पत्र पार्टी के पास

बीएमसी चुनाव के बाद शिंदे गुट में नाराजगी, पार्षदों के प्रमाण पत्र पार्टी के पास

Last Updated Jan - 20 - 2026, 03:52 PM | Source : Fela News

बीएमसी चुनाव के बाद शिवसेना शिंदे गुट के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। पार्षदों को होटल में ठहराने के फैसले से नाराजगी बढ़ी, जिसके बाद पार्टी ने बड़ा कदम उ
बीएमसी चुनाव के बाद शिंदे गुट में नाराजगी
बीएमसी चुनाव के बाद शिंदे गुट में नाराजगी

मुंबई बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना शिंदे गुट में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। जीत के बाद पार्षदों को एक सात सितारा होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसी फैसले को लेकर कुछ पार्षद नाराज बताए जा रहे हैं। नाराजगी इतनी बढ़ी कि पार्टी नेतृत्व को स्थिति संभालने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े।

जानकारी के मुताबिक, कुछ पार्षदों का मानना था कि होटल में रखना अनावश्यक दिखावा है और इससे जनता के बीच गलत संदेश जा सकता है। वहीं कुछ नेताओं को यह भी डर था कि इस तरह की व्यवस्था राजनीतिक तौर पर विपक्ष को हमला करने का मौका दे सकती है। इसी असहज स्थिति के बीच पार्टी ने अपने स्तर पर नियंत्रण मजबूत करने का फैसला किया।

सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट ने जीतने वाले पार्षदों के प्रमाण पत्र अपने कब्जे में ले लिए हैं। इसे एक तरह से संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि कोई भी पार्षद जल्दबाजी में या दबाव में कोई अलग कदम न उठाए और सभी फैसले सामूहिक रणनीति के तहत हों।

हालांकि इस कदम को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह कदम पार्षदों पर भरोसे की कमी को दिखाता है या फिर यह सिर्फ एहतियात के तौर पर उठाया गया फैसला है। कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव के बाद ऐसी सावधानियां आम होती हैं, ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट या राजनीतिक सौदेबाजी को रोका जा सके।

शिंदे गुट की ओर से फिलहाल इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि सभी पार्षद एकजुट हैं और किसी तरह का मतभेद नहीं है। उनके मुताबिक, होटल में ठहराने और प्रमाण पत्र रखने का फैसला पूरी तरह संगठन के हित में लिया गया है।

बीएमसी जैसे बड़े नगर निकाय में सत्ता की गणित बेहद नाजुक मानी जाती है। ऐसे में हर पार्टी अपने पार्षदों को साथ बनाए रखने की कोशिश करती है। शिवसेना शिंदे गुट का यह कदम भी उसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह फैसला पार्टी की एकजुटता को मजबूत करता है या फिर अंदरूनी असंतोष को और उजागर करता है।

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