Last Updated Feb - 02 - 2026, 02:57 PM | Source : Fela News
फर्जी डिग्री या सर्टिफिकेट से शिक्षक बनने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी हाईकोर्ट ने सैलरी रिकवरी और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी सर्टिफिकेट या डिग्री के आधार पर शिक्षक बनने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किया है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे किसी भी शिक्षक के मामले में अधिकारियों को कोई ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए और उन्हें तुरंत सैलरी रिकवरी प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इससे पहले कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षक लंबे समय तक सेवाओं का लाभ ले रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फर्जी प्रमाण पत्र पेश करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति शून्य मानी जाएगी और संबंधित अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह आदेश शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी संदिग्ध मामलों की जांच कर रिपोर्ट जमा करें।
बताया जा रहा है कि अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षक ने फर्जी सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर सेवा ली है, तो उसे मिली सैलरी और अन्य लाभ भी रिकवर किए जाएंगे। सवाल उठाए जा रहे हैं कि इस आदेश से राज्यभर के सरकारी स्कूलों और शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की प्रक्रिया और अधिक सख्त हो जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी प्रमाण पत्र के मामले शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। हाईकोर्ट के आदेश से यह संदेश जाता है कि किसी भी स्तर पर गलत तरीके से नियुक्तियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
प्रशासन का कहना है कि निर्देश के पालन में कोई ढिलाई नहीं होगी और सभी शिक्षा अधिकारियों को मामले की समीक्षा कर कार्रवाई करनी होगी। फिलहाल, राज्य शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सभी स्कूलों और शिक्षकों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है।
यह कदम शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षक नियुक्तियों को सुनिश्चित करने के लिए अहम माना जा रहा है।
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