Last Updated Mar - 14 - 2026, 02:46 PM | Source : Fela News
संभल मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि किसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती।
संभल में रमजान के दौरान नमाज रोके जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन के फैसले पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती। अगर अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए।
यह मामला जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। कोर्ट ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सके।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पूजा किसी निजी संपत्ति पर हो रही है तो उसके लिए राज्य से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। राज्य का हस्तक्षेप तभी आवश्यक होता है जब धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाएं या सार्वजनिक संपत्ति तक फैलते हों।
इस मामले में याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान उन्हें नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उस स्थान पर एक मस्जिद स्थित है, हालांकि इसके समर्थन में कोई तस्वीर या दस्तावेज पेश नहीं किया गया।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गाटा संख्या 291 का मालिकाना हक मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम पर दर्ज है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए वहां केवल 20 नमाजियों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी।
हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और लोगों को शांतिपूर्वक प्रार्थना करने का अधिकार सुनिश्चित करे।
मामले में राज्य सरकार ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा है, जबकि याचिकाकर्ता ने पूरक हलफनामा दाखिल कर संबंधित स्थान की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड पेश करने की बात कही है। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है।
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