Last Updated Apr - 23 - 2026, 03:08 PM | Source : Fela News
ममता बनर्जी ने 2011 में ‘बदलाव’ के नारे से सत्ता पाई, अब 2026 चुनाव में उसी स्लोगन को नया रूप देकर चौथी बार वापसी की रणनीति पर दांव खेल रही हैं।
भारतीय राजनीति में नारे सिर्फ शब्द नहीं होते, बल्कि चुनावी रणनीति की रीढ़ होते हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तो यह और भी साफ दिखता है, जहां ममता बनर्जी ने अपने नारों के दम पर अलग पहचान बनाई है।
2011: ‘बदला नहीं, बदलाव चाहिए’
साल 2011 में ममता बनर्जी ने ‘बदला नहीं, बदलाव चाहिए’ का नारा दिया था। उस वक्त उनका लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाना और 34 साल से काबिज वामपंथी सरकार को हटाना था। इस नारे के जरिए उन्होंने जनता को यह संदेश दिया कि वह राजनीति में प्रतिशोध नहीं, बल्कि सुधार और शांति की राजनीति लाना चाहती हैं।
इस रणनीति ने काम किया और ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक जीत हासिल कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली।
2026: बदला हुआ संदेश, बदली रणनीति
अब 2026 के विधानसभा चुनाव में वही नारा एक नए रूप में सामने आया है। ‘बदलाव’ की जगह अब ‘बदला’ यानी प्रतिशोध की भाषा सुनाई दे रही है। यह बदलाव सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि राजनीतिक रुख में आए बदलाव को भी दिखाता है।
ममता बनर्जी अब अपने विरोधियों को कड़ा जवाब देने की बात कर रही हैं और चुनावी मैदान में आक्रामक तेवर के साथ उतर चुकी हैं।
दो शब्दों का पूरा खेल
पूरी रणनीति दो शब्दों—‘बदला’ और ‘बोडोल’ (परिवर्तन)—के इर्द-गिर्द घूम रही है। पहले जहां ममता खुद को एक शांत और सुधारवादी नेता के तौर पर पेश कर रही थीं, वहीं अब उनकी भाषा में सख्ती और जवाबी राजनीति का संकेत साफ नजर आता है।
‘मां, माटी, मानुष’ से ‘खेला होबे’ तक
ममता बनर्जी की राजनीति में नारों की हमेशा अहम भूमिका रही है। ‘मां, माटी, मानुष’ और ‘खेला होबे’ जैसे नारे सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव बनाने का जरिया बने। इन नारों ने उनकी राजनीतिक छवि को मजबूत किया और उन्हें जमीनी नेता के रूप में स्थापित किया।
दो चरणों में चुनाव, बढ़ा सियासी तापमान
2026 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान हो रहा है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो रही है, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
क्या नारा फिर दिलाएगा जीत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बदले हुए नारे के साथ ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगी?
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