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यूपी एनकाउंटर आंकड़ों पर बवाल, योगी सरकार घिरी सवालों में

यूपी एनकाउंटर आंकड़ों पर बवाल, योगी सरकार घिरी सवालों में

Last Updated Jun - 06 - 2026, 12:52 PM | Source : Fela News

UP Encounter News: यूपी में एनकाउंटर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष जाति और धर्म के आधार पर सवाल उठा रहा है, जबकि योगी सरकार इसे अपराधियों और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की कार्रवाई बता रही है।
यूपी एनकाउंटर आंकड़ों पर बवाल
यूपी एनकाउंटर आंकड़ों पर बवाल

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के पुलिस एनकाउंटर के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है. विपक्ष इस कार्रवाई को जाति और धर्म के नजरिए से देख रहा है, जबकि योगी सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बता रही है.

गाजीपुर एनकाउंटर को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं, विनीत राय के परिजनों ने भी इस मुठभेड़ पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. इसी बीच योगी सरकार के कार्यकाल में हुए एनकाउंटरों और अपराध के आंकड़ों को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

योगी सरकार में चर्चा में रहे बड़े एनकाउंटर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में कई हाई-प्रोफाइल अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए. इनमें कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे, अतीक अहमद का बेटा असद अहमद, अनिल दुजाना, टिंकू कपाला और हमजा जैसे नाम शामिल हैं. इन कार्रवाइयों को सरकार ने अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर पेश किया.

अपराध के आंकड़ों में गिरावट का दावा

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 की तुलना में 2024 तक हत्या, अपहरण, बलात्कार, चोरी और डकैती जैसे अपराधों में कमी दर्ज की गई है. सरकार इन आंकड़ों को अपनी कानून-व्यवस्था की सफलता का प्रमाण बता रही है.

मेरठ जोन सबसे आगे

मार्च 2017 से मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, मेरठ जोन में सबसे अधिक पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गईं. इसके बाद आगरा और वाराणसी जोन का स्थान रहा. हजारों अपराधियों की गिरफ्तारी और सैकड़ों के घायल होने का रिकॉर्ड भी इन जोनों में दर्ज किया गया है.

एनकाउंटर के जातीय और धार्मिक आंकड़ों पर बहस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2017 से सितंबर 2024 के बीच कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए. इनमें विभिन्न जातियों और समुदायों के आरोपी शामिल थे. विपक्ष इन आंकड़ों के आधार पर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि अपराधी की पहचान उसकी जाति या धर्म नहीं, बल्कि उसका अपराध होता है.

सीएम योगी का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते रहे हैं. उनके कार्यकाल में बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, माफियाओं की संपत्तियों पर शिकंजा और पुलिस की सख्त कार्यशैली को सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है.

गाजीपुर एनकाउंटर के बाद एक बार फिर सवाल यही है कि क्या यह अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई है या फिर राजनीतिक बहस का नया मुद्दा? आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.

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