Last Updated Aug - 06 - 2025, 02:45 PM | Source : Fela News
बेंगलुरु के डेंटिस्ट डॉ. किर्पा जोहर ने अपने साथ हुए अनुभव साझा किए और कहा कि कानून में लैंगिक संतुलन जरूरी है, ताकि पुरुषों के अधिकार भी सुरक्षित रह सकें।
बेंगलुरु के डेंटिस्ट डॉ. किर्पा जोहर ने सोशल मीडिया पर अपनी वर्षों पुरानी पीड़ा साझा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि 2015 में पत्नी के छोड़कर जाने के बाद उनके जीवन में किस तरह की त्रासदी शुरू हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठे दहेज और घरेलू हिंसा के केस लगाए गए और उनसे ₹10 करोड़ के सेटलमेंट की मांग की गई।
इस कानूनी लड़ाई के चलते न केवल उन्हें अपने बेटे की कस्टडी खोनी पड़ी, बल्कि बेटे को एक समय तत्काल सर्जरी की जरूरत थी, फिर भी वह कुछ नहीं कर सके। वहीं, उनके वृद्ध माता-पिता, जो इस संघर्ष से भावनात्मक रूप से टूट चुके थे, इस दौरान बीमार पड़े और उनकी मौत हो गई।
डॉ. जोहर ने बताया कि मुकदमेबाज़ी के चलते उन्हें अपना घर भी बेचना पड़ा और एक सम्मानित डॉक्टर से वह एक कानूनी संघर्ष में उलझे व्यक्ति बनकर रह गए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कहानी हजारों पुरुषों जैसी है, जो ऐसे कानूनों के एकतरफा प्रावधानों के शिकार बनते हैं।
अब डॉ. जोहर की मांग है कि भारतीय कानूनों को लैंगिक रूप से तटस्थ बनाया जाए ताकि किसी भी पक्ष को झूठे आरोपों के जरिए प्रताड़ित न किया जा सके और न्याय की वास्तविक भावना कायम रह सके।
Jun - 12 - 2026
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