Last Updated May - 06 - 2026, 11:14 AM | Source : Fela News
चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बताया कि इस स्थिति में राज्यपाल क्या कदम उठा सकते हैं।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। कोलकाता में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में अचानक तनाव और टकराव की स्थिति बन गई है।
“नैतिक रूप से मेरी जीत हुई है” – ममता
ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि भले ही चुनावी नतीजों को लेकर बहस हो, लेकिन उन्हें नैतिक रूप से जनता का समर्थन मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि वह राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम किया है। ममता ने यह भी ऐलान किया कि वह अब और चुप नहीं रहेंगी और सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगी।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने कहा कि उनका मुकाबला बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से था। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं रही और आयोग ने एक पक्ष के लिए काम किया। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।
संवैधानिक संकट की आशंका
ममता के इस्तीफा न देने के रुख से पश्चिम बंगाल में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति बनती दिख रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार करती हैं, तो राज्यपाल के अधिकारों को लेकर गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं।
महेश जेठमलानी का बड़ा बयान
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इस पूरे मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करती हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल कानून के तहत कार्रवाई कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल की मदद से भी कदम उठाया जा सकता है।
राज्यपाल की संभावित भूमिका और कानूनी स्थिति
संवैधानिक जानकारों के अनुसार, यदि कोई सरकार जनादेश के बाद भी पद पर बनी रहती है, तो राज्यपाल के पास विधानसभा को भंग करने और सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार होता है। उनका कहना है कि जनादेश समाप्त होने की स्थिति में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
विधानसभा कार्यकाल समाप्ति की ओर
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तर पर स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े फैसले और टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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