Last Updated Sep - 25 - 2025, 11:54 AM | Source : Fela News
Bihar Vidhan Sabha Chunav: कांग्रेस के कई नेता अपने बेटों को राजनीति में लाने की कोशिश कर रहे हैं और एक-दूसरे के बच्चों को टिकट दिलाने में भी मदद कर रहे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के करीब आते ही सभी राजनीतिक पार्टियों में टिकट बंटवारे को लेकर जोर-शोर से बैठकें चल रही हैं। नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने लिए सीट हासिल करने में लगे हैं। वहीं कांग्रेस में कुछ नेता ऐसे भी हैं जो खुद के लिए नहीं बल्कि अपने बेटों के लिए टिकट पाने में जुटे हैं।
हाल ही में दिल्ली में वरिष्ठ नेता अजय माकन की अध्यक्षता में बिहार कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में टिकट बंटवारे पर चर्चा हुई, लेकिन इस बार ध्यान सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशियों पर नहीं, बल्कि नेताओं के बेटों को लॉन्च करने पर भी रहा।
सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ नेता अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं और एक-दूसरे के बेटों को टिकट दिलाने में भी मदद कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह अपने बेटे को हर हाल में चुनाव मैदान में उतारना चाहते हैं। वहीं बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा भी अपने बेटे को राजनीति में लाने की तैयारी में हैं।
पूर्व लोकसभा स्पीकर और कांग्रेस की कद्दावर नेता मीरा कुमार अपने बेटे को विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारकर राजनीतिक ‘रीलॉन्च’ करना चाहती हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद खान और छह बार के विधायक अवधेश सिंह भी अपने बेटों को टिकट दिलाने की तैयारी में जुटे हैं।
सूत्रों का कहना है कि ये सभी नेता-पुत्र टिकट न केवल पिता की राजनीतिक विरासत बल्कि आपसी समर्थन और रणनीति के कारण भी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस में पहले भी पिता की जगह पुत्र को टिकट मिलता रहा है, और इसी वजह से बीजेपी अक्सर कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस पारिवारिक टिकट राजनीति को कितना बढ़ावा देता है और जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करता है या नहीं।
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