Last Updated Jan - 23 - 2026, 04:54 PM | Source : Fela News
मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में बीजेपी की रणनीति पर चर्चा तेज है। महिला आरक्षण और नेतृत्व चयन को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन की तैयारियां सामने आ रही हैं।
मुंबई महानगरपालिका से जुड़े सियासी समीकरणों में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। बीजेपी द्वारा अपनाए गए तथाकथित ‘डबल एम’ दांव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी मुंबई में महिला नेतृत्व और मराठी मतदाता आधार को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य 28 अहम सीटों पर भी राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, महिला आरक्षण के तहत मेयर पद से लेकर अन्य प्रमुख पदों पर संभावित नामों को लेकर अंदरूनी मंथन जारी है। बीजेपी नेतृत्व यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि शहरी राजनीति में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा। इस बीच गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल बैठाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर किसी तरह का टकराव न हो।
वहीं दूसरी ओर, शिवसेना शिंदे गुट और अन्य सहयोगी दलों की रणनीतियां भी इस राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर रही हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सीटों पर स्थानीय समीकरणों को देखते हुए उम्मीदवारों के चयन में लचीलापन रखा जा सकता है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी का यह दांव मुंबई तक सीमित रहेगा या इसका असर पूरे महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति पर दिखाई देगा।
इस बीच विपक्षी दलों ने आरोप लगाए हैं कि सत्ता पक्ष आरक्षण और पहचान की राजनीति के जरिए चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही पूरी की जाएंगी। चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नगर निकाय चुनावों की तैयारियां समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं।
बताया जा रहा है कि पुणे, ठाणे और अन्य शहरी क्षेत्रों में भी महिला आरक्षण और स्थानीय नेतृत्व को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल, मुंबई से शुरू हुआ यह सियासी दांव राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा करता दिख रहा है।
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