Last Updated Oct - 29 - 2025, 06:15 PM | Source : Fela News
लखनऊ में मायावती ने थमाई नीली टोपी, बसपा की नई रणनीति से सियासत में हलचल।
लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को पार्टी की बड़ी बैठक बुलाई, जहां एक बदला हुआ नजारा देखने को मिला। इस बार मायावती ने खुद अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को नीली टोपी पहनाई—बिलकुल उसी तरह जैसे समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव ने लाल टोपी को राजनीतिक पहचान बनाया था। इस कदम को बसपा की “नई रणनीति” और “संगठनिक ऊर्जा” का संकेत माना जा रहा है।
बैठक में मायावती ने साफ संदेश दिया कि बसपा अब फिर से जमीनी स्तर पर सक्रिय होगी और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए खुद को नए तेवर के साथ तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि नीला रंग सिर्फ बसपा का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान का प्रतीक है। कार्यकर्ताओं को नीली टोपी पहनाते हुए उन्होंने कहा—“अब वक्त है कि हर बूथ पर नीला रंग फिर से दिखे।”
राजनीतिक हलकों में मायावती का यह कदम अखिलेश यादव की राजनीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में सपा ने लगातार अपने ‘लाल टोपी’ प्रतीक को जनता के बीच उभारा है, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आई। अब मायावती भी उसी राह पर चलते हुए अपनी पार्टी को विजुअल पहचान के जरिए मजबूत करने की कोशिश करती दिख रही हैं।
बैठक में बसपा नेताओं को निर्देश दिया गया कि वे जनता के बीच पहुंचें, संगठन की पुरानी ताकत को लौटाएं और पार्टी के जनाधार को फिर से सक्रिय करें। मायावती ने यह भी कहा कि बसपा किसी भी दल की “बी-टीम” नहीं है और आने वाले चुनावों में स्वतंत्र ताकत के रूप में मैदान में उतरेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मायावती की यह नई छवि बसपा के “रीब्रांडिंग अभियान” की शुरुआत हो सकती है। एक समय यूपी की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाली बसपा हाल के वर्षों में कमजोर होती नजर आई थी, लेकिन अब लगता है कि पार्टी फिर से पुराने जनाधार को वापस पाने के मिशन पर निकल पड़ी है।
लखनऊ की इस बैठक में नीली टोपी के साथ दिखाई दी बसपा की एकजुट तस्वीर ने साफ कर दिया कि मायावती अब सियासत में चुप नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ वापसी के मूड में हैं।
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