Last Updated Nov - 06 - 2025, 03:48 PM | Source : Fela News
बेंच ने उस याचिका पर सख्त रुख दिखाया, जिसमें ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम 2021 की वैधता को पांच जजों की बेंच को भेजने की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 नवंबर, 2025) को केंद्र सरकार पर नाराजगी जताई। केंद्र ने न्यायाधिकरण सुधार कानून 2021 की वैधता पर चल रही सुनवाई को स्थगित करने की मांग की थी। यह याचिका मद्रास बार एसोसिएशन समेत कई पक्षों ने दायर की थी।
3 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की बेंच ने केंद्र की उस मांग पर सख्त रुख अपनाया था, जिसमें सरकार ने इस मामले को पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने की बात कही थी। कोर्ट ने कहा था कि सुनवाई के अंतिम चरण में सरकार से ऐसा कदम उम्मीद नहीं थी। यह कानून फिल्म प्रमाणन और अन्य अपीलीय अधिकरणों को खत्म करता है और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति व कार्यकाल के नियमों में बदलाव करता है।
मुख्य न्यायाधीश गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि सरकार बार-बार सुनवाई टालने की कोशिश कर रही है। कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सरकार की याचिका खारिज कर दी जाएगी।
गुरुवार को एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने अटॉर्नी जनरल की विदेश में चल रही अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का हवाला देकर सुनवाई आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर सीजेआई गवई ने नाराज होकर कहा, “यह अदालत के प्रति अनुचित है। हमने पहले ही दो बार छूट दी है।”
सीजेआई ने आगे कहा, “अगर आप 24 नवंबर के बाद सुनवाई चाहते हैं तो साफ बताइए। हम हर बार यह नहीं सुन सकते कि अटॉर्नी जनरल व्यस्त हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा लग रहा है कि केंद्र मौजूदा पीठ से बचना चाहता है।
अंत में कोर्ट ने तय किया कि शुक्रवार को मद्रास बार एसोसिएशन की तरफ से सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार को सुना जाएगा और सोमवार को अटॉर्नी जनरल की दलीलें ली जाएंगी। सीजेआई ने साफ कहा, “अगर वह नहीं आते, तो हम केस बंद कर देंगे।”
Jun - 12 - 2026
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