Last Updated May - 13 - 2025, 10:48 AM | Source : Fela News
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना का कार्यकाल भले ही सिर्फ छह महीने का रहा, लेकिन उनके फैसलों और कदमों ने न्याय व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बना दिया।
CJI Sanjiv Khanna Retiring:भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना का कार्यकाल सिर्फ 6 महीने का रहा, लेकिन इस छोटे से समय में उन्होंने जो फैसले लिए, उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी की मिसाल कायम कर दी।
शब्दों से नहीं, काम से पहचान
13 मई को रिटायर हो रहे जस्टिस खन्ना ज्यादा बोलने के बजाय अपने फैसलों के जरिए अपनी बात रखते थे। उन्होंने कभी कोई ऐसी टिप्पणी नहीं की जो विवाद या चर्चा का कारण बने। यह उनकी खासियत रही।
उनका स्वभाव उनके पूर्ववर्ती मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ से बिल्कुल अलग था। जहां चंद्रचूड़ खुलकर अपने विचार रखते थे, वहीं खन्ना सादा और शांत रहे। 11 नवंबर 2024 को उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला और अपने फैसलों से यह कार्यकाल यादगार बना दिया।
कैशकांड में सख्त कदम
दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर जले हुए कैश मिलने के मामले में जस्टिस खन्ना ने सख्त कार्रवाई की। उन्होंने तीन जजों की जांच कमेटी बनाई और पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक की। आरोप सही पाए जाने पर वर्मा को इस्तीफा देने को कहा गया। जब उन्होंने मना किया, तो रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी गई ताकि उन्हें संसद के जरिए हटाया जा सके।
संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक
खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने पर सहमत किया। 1 अप्रैल 2025 को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता
कोलेजियम की सिफारिशों को लेकर अक्सर पक्षपात के आरोप लगते थे। खन्ना ने पिछले 3 सालों में सरकार को भेजी गई कोलेजियम सिफारिशें सार्वजनिक कर दीं। साथ ही यह भी बताया कि कितने उम्मीदवार SC/ST, OBC, अल्पसंख्यक और महिला वर्ग से हैं और कितने किसी जज के रिश्तेदार हैं।
न्यायिक फैसले – संतुलन और संवेदनशीलता
धार्मिक विवादों पर रोक
देश भर में पुराने धार्मिक स्थलों को लेकर चल रहे मुकदमों पर उन्होंने रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि जब तक 1991 के प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं देता, तब तक कोई नई याचिका दायर नहीं की जा सकती और पुराने मामलों में कोई भी अदालत फैसला नहीं दे सकती।
वक्फ कानून पर विराम
वक्फ संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध पर खन्ना ने साफ संदेश दिया। उन्होंने कुछ धाराओं पर रोक की बात कही, जिसके बाद सरकार ने खुद ही कहा कि अब फिलहाल कोई भी वक्फ संपत्ति डिनोटिफाई नहीं की जाएगी और न ही नई नियुक्तियां होंगी।
बड़े वकीलों को विशेष treatment नहीं
अक्सर यह शिकायत होती थी कि सुप्रीम कोर्ट में बड़े वकीलों की बात जल्दी सुनी जाती है। खन्ना ने इस पर रोक लगा दी। उन्होंने तय कर दिया कि अब कोई भी वकील मौखिक रूप से सुनवाई की मांग नहीं कर सकता। सभी को नियमों के तहत आवेदन देना होगा – चाहे वो कितना भी बड़ा वकील क्यों न हो।