Last Updated Jun - 09 - 2025, 10:56 AM | Source : Fela News
बेंगलुरु स्टेडियम पर हुई भगदड़ के आरोपों पर मुख्य मंत्री ने यूपी कुंभ मेला की घटना का उदाहरण देते हुए इस्तीफे की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भीड़ के कहर पर राजनीतिक जिम्मेदारी से बचाव करते हुए कहा कि सरकार का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं था और इसी सिलसिले में उन्होंने उत्तर प्रदेश के हालिया कुंभ मेला की भगदड़ का उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा—तब किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया या सार्वजनिक रूप से माफी मांगी?
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का आयोजन कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन ने किया था, सरकार ने केवल पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई थी। इसके अलावा उन्होंने 11 लोगों की मौत पर 10‑10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की और 15 दिनों में मैजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया ।
इस बयान पर विपक्ष का तीखा रुख देखा गया। भाजपा के प्रल्हाद जोशी ने इसे “गंभीर” बताया और कहा कि कुंभ और बेंगलुरु की घटनाओं की तुलना “अशोभनीय” है। उन्होंने न्यायिक जांच की भी मांग की और कई सवाल उठाए—क्यों पुलिस की अनुमति न होने पर समारोह शुरू हुआ? मुआवजा कितना पर्याप्त है? इत्यादि ।
स्थानीय खबरों के अनुसार, भाजपा ने सिद्दारमैया, उनके डिप्टी शिवकुमार और गृह मंत्री पर इस्तीफे की भी मांग की है, जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने बचाव में कहा कि जांच और मुआवजा की व्यवस्था की गई है ।
मुख्य बिंदु:
मुख्यमंत्री ने कुंभ मेला की भगदड़ का हवाला देते हुए इस्तीफों की मांग को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि “सरकार की भूमिका केवल अनुमति व सुरक्षा तक सीमित थी।”
पुलिस ने घटना की जांच के लिए मैजिस्ट्रियल कमीशन बनाया; 11 मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया।
विपक्ष ने बयान को असंवैधानिक बताया, और न्यायिक जांच और जवाबदेही की मांग की।
यह मामला भीड़ नियंत्रण, सरकारी जिम्मेदारी और जन‑निगरानी के व्यापक सवाल खड़े कर रहा है।
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