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कोयंबटूर: पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाया गया, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल, जांच शुरू

कोयंबटूर: पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाया गया, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल, जांच शुरू

Last Updated Apr - 11 - 2025, 12:42 PM | Source : Fela News

पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाने का वीडियो वायरल हुआ, जिससे हंगामा मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
कोयंबटूर: पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाया गया,
कोयंबटूर: पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाया गया,

कोयंबटूर (तमिलनाडु) – तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के किनथुकडावु क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला भेदभाव का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक निजी स्कूल में कक्षा 8वीं की छात्रा को सिर्फ इसलिए परीक्षा कक्षा के बाहर बैठकर देनी पड़ी क्योंकि वह मासिक धर्म (पीरियड्स) में थी। यह घटना अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है और राज्यभर में भारी आक्रोश फैल गया है।

घटना स्वामी चिद्भवनंदा मैट्रिक हायर सेकेंडरी स्कूल, सेंगुट्टैपालयम गांव की है। छात्रा, जो अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से ताल्लुक रखती है, को 7 अप्रैल (सोमवार) और 9 अप्रैल (बुधवार) को दो बार परीक्षा के दौरान क्लासरूम से बाहर बैठाया गया।

माँ ने देखी बेटी की हालत, वीडियो किया वायरल
पहली बार इस अपमानजनक व्यवहार के बारे में छात्रा ने अपनी माँ को बताया। जब माँ दूसरी बार 9 अप्रैल को स्कूल पहुंचीं, तो उन्होंने अपनी बेटी को दोबारा परीक्षा के दौरान कक्षा के बाहर बैठा देखा। माँ ने तत्काल इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोगों में आक्रोश की लहर है।

जाति और जेंडर आधारित भेदभाव का गंभीर मामला
स्थानीय दलित अधिकार कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि यह वीडियो सबूत के तौर पर शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है। इस मामले ने न सिर्फ मासिक धर्म को लेकर फैली सामाजिक व मानसिक असंवेदनशीलता को उजागर किया है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव का भी उदाहरण है।

प्रशासन और समाज से उठी सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, दलित अधिकार संगठन और आम लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाए और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्कूलों में जागरूकता और संवेदनशीलता का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।


यह घटना सिर्फ एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच पर सवाल खड़ा करती है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं है, और ऐसे भेदभावपूर्ण व्यवहार का कोई स्थान आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नहीं हो सकता। अब समय आ गया है कि स्कूलों और संस्थानों में जेंडर सेंसिटिविटी और समावेशिता को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार में उतारा जाए।

कोयंबटूर: पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाया गया, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल, जांच शुरू

पीरियड्स के दौरान छात्रा को क्लासरूम से बाहर बैठाने का वीडियो वायरल हुआ, जिससे हंगामा मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

कोयंबटूर (तमिलनाडु) – तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के किनथुकडावु क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाला भेदभाव का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक निजी स्कूल में कक्षा 8वीं की छात्रा को सिर्फ इसलिए परीक्षा कक्षा के बाहर बैठकर देनी पड़ी क्योंकि वह मासिक धर्म (पीरियड्स) में थी। यह घटना अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है और राज्यभर में भारी आक्रोश फैल गया है।

घटना स्वामी चिद्भवनंदा मैट्रिक हायर सेकेंडरी स्कूल, सेंगुट्टैपालयम गांव की है। छात्रा, जो अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से ताल्लुक रखती है, को 7 अप्रैल (सोमवार) और 9 अप्रैल (बुधवार) को दो बार परीक्षा के दौरान क्लासरूम से बाहर बैठाया गया।

माँ ने देखी बेटी की हालत, वीडियो किया वायरल
पहली बार इस अपमानजनक व्यवहार के बारे में छात्रा ने अपनी माँ को बताया। जब माँ दूसरी बार 9 अप्रैल को स्कूल पहुंचीं, तो उन्होंने अपनी बेटी को दोबारा परीक्षा के दौरान कक्षा के बाहर बैठा देखा। माँ ने तत्काल इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और लोगों में आक्रोश की लहर है।

जाति और जेंडर आधारित भेदभाव का गंभीर मामला
स्थानीय दलित अधिकार कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि यह वीडियो सबूत के तौर पर शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है। इस मामले ने न सिर्फ मासिक धर्म को लेकर फैली सामाजिक व मानसिक असंवेदनशीलता को उजागर किया है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव का भी उदाहरण है।

प्रशासन और समाज से उठी सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, दलित अधिकार संगठन और आम लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाए और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्कूलों में जागरूकता और संवेदनशीलता का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।


यह घटना सिर्फ एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच पर सवाल खड़ा करती है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं है, और ऐसे भेदभावपूर्ण व्यवहार का कोई स्थान आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नहीं हो सकता। अब समय आ गया है कि स्कूलों और संस्थानों में जेंडर सेंसिटिविटी और समावेशिता को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार में उतारा जाए

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