Header Image

आधार कार्ड की पूरी कहानी: कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा पहचान सिस्टम

आधार कार्ड की पूरी कहानी: कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा पहचान सिस्टम

Last Updated Jan - 12 - 2026, 05:04 PM | Source : Fela News

आधार कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल रीढ़ है। जानिए इसका इतिहास, कानूनी आधार और वैश्विक पहचान से जुड़ी पूरी कहानी |
कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा पहचान सिस्टम
कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा पहचान सिस्टम

आधार कार्ड आज भारत में पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। यह एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जिसके जरिए देश के नागरिकों की पहचान बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से की जाती है। आधार कार्ड में व्यक्ति के फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और जनसांख्यिकीय जानकारी को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इस पूरे सिस्टम का संचालन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI करता है।

UIDAI की स्थापना जनवरी 2009 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। शुरुआती दौर में यह योजना आयोग के अधीन एक संलग्न कार्यालय के रूप में काम करता था, जिसे अब नीति आयोग कहा जाता है। बाद में आधार परियोजना को कानूनी रूप देने के लिए इसे विधायी समर्थन दिया गया। 3 मार्च 2016 को संसद में आधार से जुड़ा धन विधेयक पेश किया गया और 11 मार्च 2016 को आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 लोकसभा से पारित हुआ। इसके बाद आधार पूरी तरह एक वैधानिक पहचान प्रणाली बन गया।

वर्तमान में आधार कार्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना है। सब्सिडी, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, पेंशन, छात्रवृत्ति और कई अन्य सेवाओं में आधार की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है।

आधार कार्ड को दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आईडी सिस्टम माना जाता है। विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर ने आधार को “दुनिया का सबसे परिष्कृत पहचान कार्यक्रम” बताया था। करोड़ों लोगों को डिजिटल पहचान देने में आधार ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है।

हालांकि, आधार को लेकर कुछ सीमाएं भी स्पष्ट की गई हैं। जून 2017 में गृह मंत्रालय ने साफ किया था कि आधार कार्ड नेपाल और भूटान की यात्रा के लिए वैध पहचान दस्तावेज नहीं है। यानी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पासपोर्ट ही जरूरी रहेगा।

समय के साथ आधार ने खुद को सिर्फ पहचान पत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यह डिजिटल इंडिया अभियान का एक मजबूत स्तंभ बन गया है। आज आधार न सिर्फ सरकारी व्यवस्था को पारदर्शी बना रहा है, बल्कि आम नागरिक की पहचान को भी सुरक्षित और सरल बना रहा है। 

Share :

Trending this week

बालाकोट एयरस्ट्राइक क्या थी?

Feb - 26 - 2026

पुलवामा हमला बना कार्रवाई की वजह 

14 फरवरी 2019 को जम्मू... Read More

NCERT विवाद पर CJI सख्त

Feb - 26 - 2026

एनसीईआरटी की एक पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कथित आप... Read More

महाराष्ट्र EV नीति पर राजीव बजाज नाराज़

Feb - 26 - 2026

राजीव बजाज ने महाराष्ट्र सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ... Read More