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बालाकोट एयरस्ट्राइक क्या थी? जानिए 26 फरवरी का इतिहास

बालाकोट एयरस्ट्राइक क्या थी? जानिए 26 फरवरी का इतिहास

Last Updated Feb - 26 - 2026, 05:54 PM | Source : Fela News

26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमला किया। पुलवामा हमले के जवाब में की गई इस कार्रवाई ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता दिखाई।
बालाकोट एयरस्ट्राइक क्या थी?
बालाकोट एयरस्ट्राइक क्या थी?

पुलवामा हमला बना कार्रवाई की वजह 

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। देशभर में गुस्सा था और सरकार पर सख्त जवाब देने का दबाव बढ़ गया था। 

क्या था बालाकोट ऑपरेशन? 

विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग के अनुसार, यह “नॉन मिलिट्री प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक" थी। भारतीय वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट क्षेत्र में आतंकी प्रशिक्षण कैंप को निशाना बनाया। कार्रवाई में प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया, ताकि केवल निर्धारित लक्ष्य को ही क्षति पहुंचे। 

भारत सरकार ने कहा कि इस हमले में आम नागरिकों या सैन्य ठिकानों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। लक्ष्य केवल आतंकी ढांचा था। 

1971 के बाद पहली सीमा पार हवाई कार्रवाई 

विश्लेषकों के अनुसार, 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद यह पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर जाकर एयरस्ट्राइक की । यही कारण है कि बालाकोट ऑपरेशन को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना गया। इस कदम ने यह संदेश दिया कि भारत अब केवल रक्षात्मक रुख तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सक्रिय जवाबी कार्रवाई करेगा। 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ा तनाव 

एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। पाकिस्तान ने अगले दिन जवाबी हवाई गतिविधियां कीं। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत बनाए रखने की अपील की। 

सुरक्षा नीति में बदलाव का संकेत 

बालाकोट एयरस्ट्राइक को भारत की बदलती सुरक्षा रणनीति का प्रतीक माना गया। यह दिखाता है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगी। खुफिया जानकारी, तकनीकी क्षमता और सटीक ऑपरेशन के दम पर भारत ने अपनी सामरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। 

क्यों याद रखी जाती है 26 फरवरी की तारीख? 

26 फरवरी अब केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की सुरक्षा सोच का प्रतीक बन चुकी है। यह घटना न केवल भारत-पाक संबंधों में अहम मोड़ थी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य और कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूत करने वाली साबित हुई। 

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