Last Updated Oct - 07 - 2025, 05:31 PM | Source : Fela News
बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर घमासान मचा है। तेजस्वी यादव के नए ऑफर से न मुकेश सहनी संतुष्ट हैं और न ही वामदल मानने को तैयार।
बिहार में चुनावी हलचल तेज होते ही महागठबंधन के भीतर असहमति की दरारें उभरने लगी हैं। सीट बंटवारे पर चल रही बातचीत अब टकराव का रूप ले चुकी है। सूत्रोंके मुताबिक, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने गठबंधन सहयोगियों को जो प्रस्ताव दिया है, उससे न मुकेश सहनी खुश हैं और न ही लेफ्ट पार्टियां राज़ी दिख रही हैं।तेजस्वी यादव ने हाल ही में सीट शेयरिंग पर अपना फॉर्मूला रखा, जिसमें आरजेडी को बड़ी हिस्सेदारी देने का सुझाव था। लेकिन वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने इसे “एकतरफा फैसला”बताया। सहनी का कहना है कि उनकी पार्टी को पिछले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद पर्याप्त सीटें नहीं मिल रहीं। वहीं, वामदलों का तर्क है कि उन्हें दी गई संख्या उनके जनाधार के मुताबिक बेहद कम है। महागठबंधन के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बातचीत के कई दौर पहले ही हो चुके हैं, लेकिन अब स्थिति पेचीदा हो गई है। अगर सहमति नहीं बनी, तो कुछदल अलग रास्ता चुन सकते हैं। तेजस्वी यादव इस स्थिति को संभालने में जुटे हैं और सभी दलों से व्यक्तिगत स्तर पर बात कर रहे हैं ताकि गठबंधन टूटने की नौबत न आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद महागठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्योंकि अगर विपक्षी दल एकजुट नहीं हुए, तो इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।बिहार की राजनीति में कहा जाता है—“एक अनार सौ बीमार।” और इस बार वह कहावत महागठबंधन की हालत पर बिल्कुल सटीक बैठती दिख रही है।