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फडणवीस को फंसाने की साजिश ? SIT रिपोर्ट से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल

फडणवीस को फंसाने की साजिश ? SIT रिपोर्ट से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल

Last Updated Jan - 10 - 2026, 11:58 AM | Source : Fela News

महाराष्ट्र में SIT रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। CM देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे को झूठे केस में फंसाने की साजिश का आरोप।
फडणवीस को फंसाने की साजिश
फडणवीस को फंसाने की साजिश

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जबरदस्त हलचल मच गई है। एक विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2016 के एक पुराने मामले को दोबारा खोलकर मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे केस में फंसाने की कथित साजिश रची गई थी। इस मामले में महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

SIT की यह रिपोर्ट राज्य की पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मी शुक्ला द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति से महज पांच दिन पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को कानूनी पचड़े में फंसाने के प्रयास किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, ठाणे नगर पुलिस थाने में साल 2016 में श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जो बिल्डर संजय पुनमिया और अग्रवाल के बीच साझेदारी विवाद से जुड़ा था। इस केस में 2017 में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी। इसके बावजूद, जब संजय पांडे मुंबई पुलिस आयुक्त बने और बाद में डीजीपी के पद पर पहुंचे, तो इस पुराने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए गए।

SIT ने इस दोबारा जांच को संदेहास्पद बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केस को दोबारा खोलने के पीछे कानूनी आवश्यकता से ज्यादा राजनीतिक मंशा दिखाई देती है। जांच दल का मानना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मामले को इस तरह मोड़ना था, जिससे फडणवीस और शिंदे को इसमें घसीटा जा सके।

इस खुलासे के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेताओं ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल, SIT की सिफारिशों पर राज्य सरकार के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है। अगर पूर्व डीजीपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों पर केस दर्ज होता है, तो इसका असर सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी गहरा पड़ सकता है। यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ने के आसार दिखा रहा है।

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