Last Updated Oct - 11 - 2025, 02:57 PM | Source : Fela News
उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार की मौत के पांच दिन बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। परिवार ने आरोप लगाया है कि पोस्टमार्टम से पहले पुलिस ने बिना सहमति क
उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार की मौत ने राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिजन अब भी न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं। परिजनों का आरोप है कि पूरन कुमार की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और पुलिस ने पोस्टमार्टम से पहले परिवार की अनुमति लिए बिना शव को ले जाकर जबरदस्ती प्रक्रिया पूरी की।
परिजनों ने भावुक होकर कहा, “एक ADG स्तर के अफसर की मौत हो गई और पांच दिन हो गए, अब तक इंसाफ नहीं मिला। अगर एक बड़े अधिकारी के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम लोगों के साथ क्या होगा?” मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, जब पुलिस शव को ले जाने लगी तो परिवार के सदस्य विरोध में उतर आए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कानूनी औपचारिकता के तहत की गई है और किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। वहीं, परिवार का दावा है कि वे चाहते थे कि पोस्टमार्टम स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की निगरानी में हो, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ पुलिस विभाग बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है, जहां लोग मांग कर रहे हैं कि पूरन कुमार की मौत की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले।
फिलहाल, मामला अभी भी जांच के अधीन है, लेकिन परिवार की व्यथा और लगातार उठते सवाल बता रहे हैं कि यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम पर अविश्वास की एक गूंज बन चुकी है।