Last Updated Aug - 30 - 2025, 03:03 PM | Source : Fela News
राहुल गांधी ने पूछा कि देश की शीर्ष 500 कंपनियों और बड़े अस्पतालों में कितने CEO या बॉस दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्ग से आते हैं। विपक्षियों ने इसे भ्रामक और जात
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ताजा बयान ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की शीर्ष 500 कंपनियों और बड़े अस्पतालों में कितने CEO और बॉस दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्ग से आते हैं। राहुल गांधी का कहना है कि इन संस्थानों में प्रतिनिधित्व की कमी दिखती है और यह सामाजिक असमानता का प्रमाण है।
हालांकि, उनके इस बयान पर आलोचकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विपक्षियों का कहना है कि राहुल गांधी बिना ठोस आंकड़े दिए केवल समाज में जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि बिजनेस और संस्थानों में चयन का आधार प्रतिभा और प्रदर्शन होना चाहिए, न कि जातीय पहचान।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी सवाल खड़े करते हैं। उनका तर्क है कि देश में कॉरपोरेट और संस्थानों का संचालन योग्यता, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के आधार पर होता है, ऐसे में जाति को केंद्र में लाना अनावश्यक विवाद पैदा करता है।