Last Updated Oct - 04 - 2025, 12:47 PM | Source : Fela News
Delhi News: दिल्ली में शराब पर टैक्स 2014 से नहीं बढ़ाया गया और MRP तीन साल पहले अपडेट हुआ था. इस वजह से सरकार की आय कम हो रही है और शराब का कारोबार सिर्फ सीमित
दिल्ली में 3 अक्टूबर को आबकारी पैनल की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने की। बैठक का उद्देश्य शराब पर टैक्स और अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बदलाव करना और नई मद्य नीति का मसौदा तैयार करना था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई शराब नीति से दिल्ली को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है और NCR के शहरों जैसे गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में होने वाले राजस्व नुकसान को भी रोका जा सकेगा।
पुरानी दरों और नीतियों का असर:
दिल्ली में शराब पर टैक्स 2014 से नहीं बढ़ा और MRP तीन साल पहले अपडेट हुई थी। इससे राज्य का राजस्व कम हो रहा है और शराब का कारोबार सिर्फ सीमित श्रेणियों तक सिमट गया है। सभी शराब पर समान बॉटल मार्जिन होने से रिटेलर्स सस्ती शराब रखना पसंद करते हैं, जबकि लोकप्रिय और हाई-एंड शराब की दुकान में उपलब्धता कम हो जाती है। इससे ग्राहकों के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं।
नई नीति की प्रक्रिया और लाभ:
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार पारदर्शी और जिम्मेदार मद्य नीति बना रही है। नई नीति में शराब राजस्व, प्रति बॉटल रिटेल मार्जिन, व्यवसाय में आसानी, कानूनी शराब की उम्र और निजी खिलाड़ियों की भागीदारी जैसी बातें शामिल होंगी। मसौदा तैयार होने के बाद इसे आम जनता और हितधारकों के सामने सार्वजनिक समीक्षा के लिए रखा जाएगा।
आगे की राह और अपेक्षित परिणाम:
सुझावों के आधार पर मसौदा कुछ महीनों में तैयार हो सकता है। इसके बाद कैबिनेट और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। नई नीति से सरकार को ज्यादा राजस्व मिलेगा, शराब व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के विकल्प बढ़ेंगे। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और NCR के शहरों के साथ होने वाले राजस्व नुकसान को भी रोका जा सकेगा।