Header Image

वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी

वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी

Last Updated Feb - 04 - 2026, 03:26 PM | Source : Fela News

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कानून की पढ़ाई करने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में दलील न देने को लेकर चर्चा है। इसके पीछे अधिवक्ता अधिनियम और बार काउंसिल के नियम अहम ब
वकील ममता बनर्जी
वकील ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से दलील न देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आम तौर पर यह तथ्य सामने आता है कि ममता बनर्जी कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं और एलएलबी डिग्री धारक हैं। इसके बावजूद वह किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील पक्ष नहीं रख सकतीं। इसके पीछे भारतीय कानून व्यवस्था से जुड़े स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार, केवल कानून की डिग्री होना किसी व्यक्ति को अदालत में वकालत करने का स्वतः अधिकार नहीं देता। भारत में वकालत करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत संबंधित राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य होता है। इसके अलावा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति सक्रिय राजनीति या सरकारी पद पर है, वह प्रैक्टिसिंग एडवोकेट के रूप में अदालत में पेश नहीं हो सकता।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने भले ही कानून की शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन वह बार काउंसिल में पंजीकृत प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर रहते हुए उनके लिए अदालत में पेश होकर दलील देना नियमों के दायरे में नहीं आता। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में किसी भी मामले में उनकी ओर से वरिष्ठ वकील या अधिकृत अधिवक्ता ही पक्ष रखते हैं।

वहीं दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कोई भी नागरिक, यदि वह स्वयं किसी मामले में पक्षकार है, तो व्यक्तिगत रूप से अदालत में अपनी बात रख सकता है। हालांकि, जब मामला राज्य सरकार या संवैधानिक संस्था से जुड़ा हो, तो वहां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। इस स्थिति में सरकार की ओर से अधिकृत वकील ही अदालत में दलील पेश करते हैं।

इस बीच, कानूनी विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में वकालत के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड होना आवश्यक है, जो एक अतिरिक्त योग्यता और प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। बताया जा रहा है कि इन्हीं कानूनी प्रावधानों के कारण ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में स्वयं दलील नहीं रख पाएंगी। प्रशासन का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया नियमों के तहत ही संचालित होती है और सभी पक्षों को उन्हीं का पालन करना होता है।

यह भी पढ़े 

हाइवे पर लापरवाही पड़ी भारी, कार टक्कर में उछला व्यक्ति नीचे।

Share :

Trending this week

CJP चीफ का बयान वायरल

Jun - 12 - 2026

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के राज्यसभा सांसद स... Read More

TMC के 19 सांसदों ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी

Jun - 12 - 2026

ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की चर्चाओं के बीच सामने आई 19 ट... Read More

'370 रुपये बिरयानी' विवाद बढ़ा

Jun - 12 - 2026

370 Rupees Biryani Controversy:गुरुग्राम के चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ वि... Read More