Last Updated Feb - 11 - 2026, 05:54 PM | Source : Fela News
“कयामत की रात” को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। हाल ही में इस विषय पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गय
इस्लामी मान्यताओं में कयामत (प्रलय) को उस दिन के रूप में देखा जाता है जब पूरी दुनिया का अंत होगा और इंसानों के कर्मों का हिसाब होगा। कई धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में यह माना जाता है कि कयामत से पहले कई बड़े संकेत दिखाई देंगे, लेकिन इसका सटीक समय केवल ईश्वर को ही ज्ञात है।
कुछ मान्यताओं में “कयामत की रात” को प्रतीकात्मक रूप से उस भयावह समय के रूप में बताया जाता है जब अन्याय, पाप और अराजकता चरम पर पहुंच जाएगी। हालांकि इस्लामिक विद्वानों का कहना है कि कयामत की कोई तय तारीख या रात निर्धारित नहीं है, और इसके बारे में निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में इसी संदर्भ में कहा कि कयामत का दिन आने वाली कोई घटना नहीं है, बल्कि इसे धार्मिक और वैचारिक प्रतीक के रूप में समझा जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद धार्मिक मान्यताओं, व्याख्याओं और अलग-अलग दृष्टिकोणों पर नई बहस छिड़ गई है।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि कयामत का विचार लोगों को नैतिक जीवन जीने, अच्छे कर्म करने और मानवता के मार्ग पर चलने की सीख देने के लिए भी प्रस्तुत किया जाता है, न कि भय फैलाने के लिए।
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